पंजीयन एवं मुद्रांक की आय में हुई 550 प्रतिशत तक वृद्धि

पंजीयन एवं मुद्रांक की आय में हुई 550 प्रतिशत तक वृद्धि

भोपाल : (मुकेश मोदी)—– प्रदेश में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के राजस्व में वर्ष 2003-04 के मुकाबले वर्ष 2016-17 में 550 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

विभाग की वर्ष 2003-04 में राजस्व आय करीब 616 करोड़ रुपये हुआ करती थी, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 3947.47 करोड़ रुपये हो गई है।

प्रदेश में दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को सुलभ एवं सरल बनाने के लिए संपदा (स्टाम्प एण्ड मेनेजमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एण्ड डाक्यूमेंट्स एप्लीकेशन) सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।

यह एक वेब इनेब्ल्ड प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत अचल संपत्ति के दस्तावेजों का ई-पंजीयन एवं जिन दस्तावेजों में स्टाम्प शुल्क देय है, उनकी ई-स्टाम्पिंग की जाती है।

विभाग में संपदा परियोजना लागू होने से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ एक ही सम्पत्ति की एक ही विक्रेता द्वारा बार-बार रजिस्ट्री कर विक्रय किये जाने पर रोक लगाई गई है।

पूर्व में पंजीयन के लिए प्रस्तुत दस्तावेज अपर्याप्त स्टाम्प लगाकर लंबित रखे जाते थे। संपदा परियोजना में अपर्याप्त रूप से मुद्रांकित दस्तावेज पंजीयन के लिए स्वीकार ही नहीं होते है। इस प्रक्रिया से अब राज्य शासन का राजस्व अवरूद्ध नहीं होता।

संपदा परियोजना से स्टाम्प डयूटी और रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन भरने की व्यवस्था हुई है। इससे सभी कार्य कैशलेस हो गये है और फर्जी स्टाम्पों के प्रचलन पर भी रोक लगी है। संपदा परियोजना से केन्द्र सरकार के कैशलेस लेन-देन के उद्देश्यों को प्रदेश में सफल बनाया गया है।

कार्यालय भवनों का निर्माण

वर्ष 2003-04 से वर्ष 2016-17 की अवधि में प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिला पंजीयक और उप-पंजीयक कार्यालय के भवनों का निर्माण किया जा चुका है। भवन निर्माण से स्थायी अभिलेख की सुरक्षा हो सकी है। विभाग का राज्य स्तरीय मुख्यालय भवन अरेरा हिल्स में बनाया जा चुका है।

राज्य स्तरीय मुख्यालय में निर्माण, सुविधाओं और रख-रखाव के पैमाने के स्तर को ध्यान में रखते हुए, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने विभागाध्यक्ष की श्रेणी में महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय मध्यप्रदेश को पहला पुरस्कार दिया है। वर्ष 2017-18 में यह राजस्व बढ़कर 4800 करोड़ रुपये हो गया है।

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