सूखा राहत कार्यों की समीक्षा :- मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

सूखा राहत कार्यों  की समीक्षा :- मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

अजय वर्मा——————— मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश की सरकार संवेदनशील सरकार है। इसी भावना के साथ सूखे के दौरान कार्य किये जायें। पेयजल आपूर्ति का प्रोजेक्शन मानसून आगमन की विभिन्न संभावनाओं के आधार पर तैयार किया जाये।CM-Drough-Review--

उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे के संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक और तात्कालिक प्रयासों की अलग-अलग रणनीति बनाए। श्री चौहान आज मंत्रालय में सूखा राहत कार्यों से संबंधित विभागों की समीक्षा कर रहे थे।

बैठक में उद्यानिकी फसलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमित किये जाने की कार्रवाई का भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्रामीण अंचल के हर-घर में नल-जल उपलब्ध करवाने का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम बनाया जाये। नल-जल आपूर्ति के लिए बड़े जल स्त्रोत, उदवहन और सतही जल संग्रहण आधारित योजनाएँ तैयार की जाये। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय कर पाइप लाईन बिछाने का कार्य करें ताकि ग्रामीण सड़कों के निर्माण के साथ पाइप बिछाए जा सके।

बताया गया कि राज्य में जल प्रबंधन का बेहतर काम हुआ है। फलत: सूखे की स्थिति में भी हर बसाहट में पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है। रबी में अच्छी फसल हुई है। खरीफ में सोयाबीन, उड़द, मूंग की फसलें सूखा प्रभावित होने के बावजूद अरहर, कपास और सिचिंत धान की फसलों में अच्छा उत्पादन मिला है।

मानसून के आगमन की विभिन्न संभावनाओं के दृष्टिगत कृषि कार्य-योजना तैयार है। सभी जिलों की जिला सिंचाई योजनाएँ भी बन गई हैं। प्रदेश में सूखा प्रभावित किसानों को रियायती दर एक रूपए प्रति किलो की दर से गेहूँ, चावल और नमक प्रदाय किया जा रहा है।

उद्यानिकी फसलों को ओला वृष्टि से सुरक्षा मिलें

बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उद्यानिकी फसलों को बीमित किए जाने के कार्य की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि भूमि के ऊपर लगने वाली उद्यानिकी फसलों को ओला वृष्टि के लिए भी बीमित करने की व्यवस्था की जाये।

बताया गया कि बीमा राशि के प्रीमियम का मात्र 5 प्रतिशत उद्यानिकी कृषकों को देना होगा। शेष राशि का 50-50 प्रतिशत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उद्यानिकी फसलों के बीमे के लिए प्रदेश को पाँच कलस्टर में विभाजित किया गया है।

बैठक में वित्त, राजस्व, जल संसाधन, कृषि, ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव उपस्थित थे।

 

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