===कौमी एकता== डोरी लाल भास्कर

===कौमी एकता== डोरी लाल भास्कर

भारत में एकता में विभिन्नता समाई है,
जातियता की पहचान उपनाम से लगाई है।
कौमी एकता की जरूरत इसलिए आई है,
विभिन्नता में भिन्नता है एकता कब हो पाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई है

कौमी एकता का झूंठा प्रचार करते हो,
संसद में चमार कहने से नहीं डरते हो।
वैमनुष्यता ने संसद की गरिमा मिटाई है,
झूण्ठी पहचान क्यों भाई उपनाम से बनाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई। है।

प्रक‌ति ने सबको एक जैसा ही बनाया है,
इस पवित्र प्रक‌ति को क्यों कलंकित कराया है।
धर्म के ठेकेदारों ने मानवता नीचे गिराई है।
छोटे-बड़े की ही रीत इन ठेकेदारों ने बनाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई है।

मनु की मीमांसा पर क्यो इतराते हो,
धर्म की आड़ में खाई क्यों बनाते हो।
बुद्ध की समता क्यों नहीं अपनाते हो,
बन्धुता की पहचान विश्व में गमाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई है।

संगठित होकर कैमी एकता को अपना लो,
जातियता का कलंक सदैव के लिए मिटा लो।
तब कौमी एकता का संगीत देगा सुनाई है,
यदि ऊँच-नीच की भावना दिल से मिटाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई है।

कौमी एकता के दिवस पर सब कसम खा लो,
राष्ट्र हित में अपने नाम से उपनाम को हटा लो।
खोया हुआ सम्मान भारत को फिर मिल जायेंगा,
“भास्कर” इस में ही होगी सब ही की भलाई है।
भारत में एकता में विभिन्नता समाई है।

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