करवाचौथ: आधार छंद- दोहा छंद + मधुमालती छंद : सुनीता श्रीवास्तव

करवाचौथ: आधार छंद- दोहा छंद + मधुमालती छंद : सुनीता श्रीवास्तव

सुनीता श्रीवास्तव :

सुंदर भारत वर्ष में, सुंदर सब त्योहार।

सुंदरता की भूमि यह,सुंदर है आचार।।

करवा चौथ महान में, सुंदर शशि आकार।

पूजन करतीं पत्नियाँ, पाने को पति प्यार।।

चौथ का यह पर्व सुंदर, पर्व की हर बात सुंदर।

चंद्र जिसके केंद्र में हैं दर्शनात्मक गात सुंदर।

हो रहा जिनके लिए व्रत सामने पति मूर्त्त सुंदर,

भाग्य के इस पर्व में दृग दिव्यतम सौगात सुंदर।।

सुंदरतम् इस पर्व में, दिखे न तनिक विकार।

करवा चौथ महान का, सुंदरतम् आचार।।१

मेंहदी का रूप रक्तिम दे रही आभास सुंदर।

केश कुंचित दे रहे हैं बादलों का भास सुंदर।

शुभ्र मुखड़ा दिख रहा है चाँदनी युत चंद्रिका- सी,

चाँद को शुभ अर्घ्य देती चाँदनी का हास सुंदर।।

पति से पाती पत्नियाँ, पावन- सा उपहार।

करवा चौथ महान का, सुंदरतम् आचार।।२

नख शिखा तक चाँदनी का दिव्यतम श्रृंगार सुंदर।

अप्सरा- सी वेश धरती, धर अधर पर प्यार सुंदर।

माँगबेदी कर्णफूली शोभती है नत्थ मुखपर,

हस्त कंगन अँगुठियों में स्वर्ण का आकार सुंदर।।

स्वर्ण कलश करवा लिए, पूज रही हैं नार।

करवा चौथ महान का, सुंदरतम् आचार।।३

कल्मषों को शीघ्र बदले देव का अनुराग सुंदर।

व्रत लिए वे निर्जला का कर रही है त्याग सुंदर।

हो रहा है जतन अनुपम माँग के सिंदूर के हित,

सूखते हैं होंठ रक्तिम पर अडिग वैराग्य सुंदर।।

पूजा अरु विश्वास से, चंद्र देव साकार।

सुंदर करवा चौथ का, सुंदरतम् आचार।।४

गज-वदन को पूज भद्रे बन रही हैं भद्र सुंदर।

हाथ में चलनी लिए तत् देखती हैं चंद्र सुंदर।

देख करके चाँद अपना, चाँदनी- सी खिल रही हैं,

रूप सुंदर भाव सुंदर पर्व का व्यवहार सुंदर।।

नीर पिलाकर प्रेम युत , पति करते हैं प्यार।

करवा चौथ महान का, सुंदरतम् आचार।।

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