3.30 करोड़ लोगों के घर गैस पहुंचना क्या काम नहीं है –पीएम नरेंद्र मोदी

जी न्यूज पर प्रधानमंत्री मोदी का साक्षात्कार का संक्षेपन
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सवाल: क्या विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ-साथ होने चाहिए?

पीएम नरेंद्र मोदी: चुनाव आने पर ‘फेडरल स्ट्रक्चर’ को चोट पहुंचती है. सुरक्षाबलों के लाखों जवान अक्सर चुनाव में लगे रहते हैं.

राज्यों के तमाम बड़े अफसरों को ऑब्जर्वर के रूप में दूसरे राज्यों में भेजा जाता है.

पोलिंग बूथ पर बड़ी तादाद में कार्यबल जुटे रहते हैं.

काफी बड़ी रकम खर्च होती है.

अब देश का वोटर समझदार है.

वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव में फर्क समझता है.

इन दोनों चुनावों को साथ-साथ होना चाहिए. इसके एक महीने बाद स्थानीय चुनाव होने चाहिए.

सब मिलकर ऐसा सोचेंगे तो यह संभव हो सकता है.

सवाल: आप क्या लक्ष्य लेकर दावोस जा रहे हैं?

पीएम नरेंद्र मोदी: इस सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भलीभांति जानती है कि दावोस एक प्रकार से अर्थ जगत की एक बड़ी पंचायत बन गया है.

अर्थ जगत के सभी बड़े लोग वहां इकट्ठे होते हैं.

भावी आर्थिक स्थिति क्या रहेगी उस पर फोकस रहता है.

कॉम्बिनेशन ऐसा है कि स्वयं अर्थ जगत के लोग होते हैं.

एक प्रकार से सब विषयों के पॉलिसीमेकर्स होते हैं. जबसे पीएम बना हूं तब से मन था, लेकिन जा नहीं पा रहा था. इस बार एशियान मीटिंग हो रही है.

10 मुखियाओं की मीटिंग यहां हो रही है, पर पहले से भारत आकर्षण का केन्द्र है, अर्थ जगत का ध्यान हम पर है. एक तो भारत की जीडीपी तेज़ी से बढ़ रही है.

डेमोक्रेटिक वैल्यूज. इट’स यूनिक कॉम्बिनेशन. तो भारत के लिए अवसर है.

भारत बहुत बड़ा मार्केट तो है ही. एक बहुत बड़ा डेमोग्राफिक डिविडेंड वाला देश है.

भारत विश्व का आकर्षण का केन्द्र है तो स्वाभाविक है कि विश्व उससे सीधा संपर्क करना चाहता है.

सवाल: आप दोस्ती कर लेते हैं, अभी नेतन्याहू की विज़िट और यूनिक स्टाइल ऑफ डिप्लोमेसी है, आप कैसे कनेक्ट करते हैं?

पीएम नरेंद्र मोदी: कभी-कभी कुछ कमियां शक्ति में बदल जाती हैं. मेरा मूल स्वभाव रहा है अभाव को अवसर में बदलना.

ये एडवांटेज था – मेरे पास कोई बैगेज नहीं था. मैं कहता था कि भाई हम आम इंसान की तरह जिएंगे.

अब ये स्टाइल दुनिया को पसंद आ गया है. कोशिश करता हूं कि देश का नुकसान न करूं.

सवाल: भारत में एफडीआई 36 बिलियन से 60 बिलियन हो गया है.

2014 से 2018 में क्या फ़र्क है भारत के स्टेटस में?

पीएम नरेंद्र मोदी: 2014 के बाद से भारत दुनिया से डायरेक्ट कनेक्ट हो रहा है. गुड गवर्नेंस, ट्रांसपैरेंसी इत्यादि. जब दुनिया ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में 142 से 100 रैंक पर जाना देखती है, तो ये उनके लिए बड़ी बात है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मैन्डेट सबसे महत्वपूर्ण है, मोदी नहीं. मेरा काम है 125 करोड़ भारतीयों की आवाज मानना.

सवाल: जीएसटी और नोटबंदी कितने सफल रहे. जो टारगेट आपने चुना वो कितना पूरा हुआ ?

पीएम नरेंद्र मोदी : हमारे चार साल के काम को देखें.

इस देश में बैकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भी 30-40% लोग बैंकिंग सिस्टम से बाहर हैं.

हम उनको वापस लाए हैं. क्या ये उपलब्धि नहीं है ?

लड़कियों के स्कूल के लिए शौचालय, क्या ये कम नहीं है ? 3.30 करोड़ लोगों के घर गैस पहुंचना क्या काम नहीं है.

90 पैसे में ग़रीब का इंश्योरेंस, क्या ये काम नहीं है.

जहां तक जीएसटी का सवाल है,

मैं जब गुजरात का सीएम था तो बोलता था, पर नहीं सुनी जाती थी. एक देश, एक टैक्स की दिशा में हमने बहुत बड़ी सफलता पाई.

कोई व्यवस्था बदलती है तो थोड़े एडजस्टमेंट करने होते हैं. जब लॉन्ग टर्म में देखा जाएगा तो इन्हें बहुत सफल माना जाएगा.