अस्पतालों में बेटी के जन्म होने पर माता-पिता को ग्रीटिंग कार्ड

रायपुर ——– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता की योजना -बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लगातार अच्छी सफलता मिल रही है। इस योजना के बहतरीन नतीजे आ रहे हैं।

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प्रमुख सचिव वित्त श्री अमिताभ जैन, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता, गृह विभाग के सचिव श्री अरूण देव गौतम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री विकास शील,

मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड की अध्यक्षता में आज शाम यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में ’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के राज्य स्तरीय कार्य दल की बैठक हुई, जिसमें योजना के ’रायगढ़ मॉडल’ की विशेष रूप से तारीफ की गयी।

प्रदेश भर में कन्या भ्रूण की रक्षा के लिए सोनाग्राफी सेंटरों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए। श्री ढांड ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना आधिकारिक रूप से वर्तमान में केवल रायगढ़ जिले में चल रही है, लेकिन हमें पूरे प्रदेश के 660 पंजीकृत सोनोग्राफी सेंटरों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।

मुख्य सचिव ने इस बात पर खुशी जताई कि रायगढ़ जिले के सरकारी अस्पतालों (प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों) में महिलाओं के संस्थागत प्रसव की संख्या 92 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई है। गर्भवती माताओं का पंजीयन करते हुए संस्थागत प्रसव को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

श्री ढांड ने कहा कि रायगढ़ शायद छत्तीसगढ़ का इकलौता जिला है, जहां इन सरकारी अस्पतालों में बेटियो का जन्म होने पर उनके माता-पिता को ग्रीटिंग कार्ड देकर उनका अभिनंदन भी किया जाता है। उन्होंने इसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जनजागरण की दृष्टि से एक नया और अच्छा प्रयोग बताया।

उन्होंने कहा-रायगढ़ जिले को इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि पूरे देश में न्यूनतम शिशु लिंग अनुपात के आधार पर जिन 100 जिलों का चयन किया गया था, उनमें छत्तीसगढ़ का रायगढ़ भी शामिल है। बच्चों के जन्म के समय लिंग आधारित भेद-भाव को समाप्त करने के लिए जन-जागरण इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।

छत्तीसगढ़ में रायगढ़ के बाद इस योजना में बालोद, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कबीरधाम और नारायणपुर में भी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की तर्ज पर कार्य संचालित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

मुख्य सचिव श्री ढांड ने आज की बैठक में कलेक्टर रायगढ़ श्रीमती शम्मी आबिदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना की प्रगति की जानकारी ली। श्री ढांड ने कहा कि प्रदेश में प्रति एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 993 है। यह एक अच्छी स्थिति है। उन्होंने रायगढ़ जिले में योजना शुरू होने के बाद लिंग अनुपात बेहतर होने को एक अच्छा संकेत बताया।

कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जानकारी दी कि रायगढ़ जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति एकहजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 947 थी, लेकिन बीच में वर्ष 2014-15 में यह घटकर 918 रह गई थी।

इस बीच प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत मे शुरू की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले को शामिल किए जाने के बाद प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कई कदम उठाए गए। फलस्वरूप वर्ष 2015-16 में प्रति एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या बढ़कर 928 और पिछले वर्ष 2016-17 में 936 हो गई।

रायगढ़ जिले में शिशु मृत्यु दर वर्ष 2011 के 65 की तुलना में वर्ष 2016-17 में घटकर 48 और मातृ मृत्युदर वर्ष 2011 के 293 की तुलना में घटकर 180 रह गई है।

बैजिले प्रत्येक विकासखण्ड, सभी ग्राम पंचायतों, वार्डो, आंगनबाड़ी भवनों और सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में गुडड्ा-गुडियां बोर्ड स्थापित किये गये। जिसमें मासिक रूप से जन्म लेने वाले बालक एवं बालिकाओं की संख्या प्रदर्शित की जा रही है। जिले के सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में बेटी-पढ़ाओ-बेटी बचाओ थीम वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की मितानिनों का भी सहयोग लिया जा रहा है।

बैठक में प्रमुख सचिव वित्त श्री अमिताभ जैन, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता, गृह विभाग के सचिव श्री अरूण देव गौतम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री विकास शील, समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री पी.सी. मिश्रा, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अनिल साहू, और योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री आशीष भट्ट, विशेष सचिव नगरीय प्रशासन डॉ. रोहित यादव, विशेष सचिव आदिम जाति विकास श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।