साक्षात्कार— न्यूटन की गति के तीसरे नियम में संशोधन भूमिका—-अजय शर्मा

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सर आइजक न्यूटन, इस नाम का मतलब है विज्ञान का भगवान, क्या न्यूटन के तीसरे नियम मे संशोधन संभव है ?

जी हां यह संभव है यह कथन है Deputy Distt Education Officer अजय शर्मा का जो पिछले 36 वर्षों से सांइस के फंडामैंटल नियमों पर रिसर्च कर रहे है।

अजय शर्मा के अनुसार न्यूटन को तीसरा नियम अर्थात क्रिया या प्रतिक्रिया, ऐक्सन या रैक्सन, वस्तु की संरचना (Composition) और वस्तु के आकार, (the shape of body) की अनदेखी करता है। इसलिए एक्सन, रैक्सन के बराबर, कम या ज्यादा भी हो सकती है।

(Action may be equal , less or more than reaction)

2018 में अजय शर्मा अपना रिसर्च पेपर वाशिंगटन, अमेरिका में अमेरिकन ऐसोसिएसन आफ टीचर्ज की कान्फरैस ( American Association of Physics Teachers ) में प्रस्तुत कर चुके है। इस 2018 में उन्होंने अपना शोधपत्र 105 वीं Indian Science Congress मणिपुर यूनिवर्सिटी मे भी प्रस्तुत किया।

अमेरिकन ऐसोसिएसन आफ फिजिकल टीचर्स के प्रेजीडेट प्रों गौरडन पी रामसे (Professor Gordon P Ramsey )ने 22 अगस्त, 2018 की रिपोर्ट में कहा है कि अजय के प्रयोगो से न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन संभव है। उन्होनें अजय शर्मा को प्रयोगों द्वारा आंकडे़ पेश करने का कहा है। इन प्रयोगो पर 8-10 लाख रुपये खरच होंगे . जबकि इसरो के गगनयान का खरच 10-12 हज़ार करोड़ रुपये है. इस सम्बंध में हमने अजय शर्मा से बातचीत की ।

प्रः1 न्यूटन की गति का तीसरा नियम क्या है ? आप कैसे कह सकते है है कि नियम में वस्तु का आकार और कम्पोजीसन महत्त्वपूर्ण है। न्यूटन का नियम और बाकी वैज्ञानिक इसके बारे में 332 वर्षा से कुछ नही कहते है।

अजय शर्मा: न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार हर क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।

To every action there is equal and opposite reaction. ( Action = -Reaction)

वस्तु चाहे रबड़ लकड़ी या स्पंज की हो, नरम, सख्त या लचीली हो, वस्तु का आकार गोलाकर, अर्ध गोलाकार, अनियमित या फ्लैट (सपाट) हो। सभी अवस्थाओं में इसका प्रयोग होता है। इस तरह यह नियम यूनिवर्सल है, क्रिया या प्रतिक्रिया, एक्सन या रैक्सन सभी अवस्थाओं में बराबर और विपरीत होती है।

(क्रिया = – प्रतिक्रिया),

पिछले 332 वर्षों में वैज्ञानिकों ने वस्तु के आकार और कमपोजीसन को परखने के लिए प्रयोग ही नहीं किये हैं । इन बचे हुए प्रयोगों को करने के लिए अमेरिकन एसोसिएसन आफ फिजिक्स टीचर्ज के प्रैजीडैंट प्रो गौरडन रामसे, ( Professor Gordon P Ramsey, President American Association of Physics Teachers) , Indian Science Congress और अन्य वैज्ञानिकों ने, लिखित रूप में कहा है।
प्रोः गोरडन के अनुसार इन प्रयोगों में न्यूटन के नियम की खामी सामने का सकती है। इसलिए न्यूटन के तीसरे नियम को संशोधित किया है।

प्रः2 पहले यह बताइए वस्तु की कम्पोजीसन (composition) या संरचना पर आधारित प्रयोग करने से न्यूटन के नियम की खामी कैसे सामने आ सकती है ? रबड़ और लकड़ी की कम्पोजीसन अलग-2 होती है

अजय शर्माः- मेरे पास रबड़ और लकड़ी की 1 कि.ग्रा. की दो गेंदे है। ये 1 मी० ऊचांई से नीचे गिरती है। तीसरे नियम के अनुसार इन पर ग्रेविटेसन (gravitation) की वजह से 9.8 न्यूटन फोरस, वेट (mg) या ऐक्सन लगती है।

जब से बस्तुएं फर्श से टकराती है तो तीसरे नियम के अनुसार इन पर 9.8 न्यूटन प्रतिक्रिया या रैक्सन लगनी चाहिए। रबड़ और लकड़ी की गेंद टकराकर बराबर रैक्सन की वजह से 1 मी० ऊपर उठना चाहिए।

रबड़ की गेंद तो 1 मी० ऊचाई तक ऊपर उठती है इसका अर्थ यह है कि एक्शन और रैक्सन बराबर है। न्यूटन का नियम यहां सही है। पर लकड़ी की गेंद लगभग 20 से.मी. तक ही ऊपर उठती है । इस तरह रैकसन कम है और न्यूटन का तीसरा नियम लकड़ी की गेंद पर ठीक नही है।

प्रः3 आप कैसे कह सकते है कि न्यूटन का नियम वस्तु के आकार ( the shape of body) के प्रयोगों में भी अधूरा साबित होता है?

अजयः ये देखिये हमारे पास रबड़ की भिन्न-2 आकार की वस्तुए है। सभी वस्तुएं रबड़ की है उनका कम्पोजीसन या संरचना समान है। सभी वस्तुएं 1 कि.ग्राम की हैं
पहले प्रयोग की तरह सभी वस्तुए 1 मी० ऊचाई से गिरती है और सभी पर समान फोरस या वेट या एक्सन 9.8 न्यूटन लगती हैं। तो टकराने के बाद सभी वस्तुओं को रैक्सन की वजह से 1 मीटर ऊंचाई तक उठना चाहिए।

वस्तुएं अलग-2 ऊंचाई तक ऊपर उठती है। इस का अर्थ यह हुआ कि प्रतिक्रिया क्रिया से कम है और न्यूटन का नियम यहां सही नही है। इसका कारण है वस्तु का आकार ( the shape of body) जिसकी न्यूटन का नियम अनदेखी करता है।

प्रः4 तो आपका न्यूटन का संशोधित नियम इन प्रयोगों की व्याख्या कैसे करता है?
अजय शर्माः पहली बात यह है कि इन प्रयोगों को जिनमें वस्तु का आकार (the shape of body), कम्पोजीसन (composition) या सरंचना को एक्सपेरिमेंटली और थ्योरैटिकली पूरी तरह स्टडी करने की जरूरत है। पिछले 332 वर्षों से वैज्ञानिकों ने ये प्रयोग नही किये है। पर नियम को सही माना जा रहा है ये प्रयोग आरिजिनल है।
एक विकल्प के तौर पर मैनें न्यूटन के तीसरे नियम का संशोधन किया है।

संशोधित नियम मे एक नया घटक आ जाता है। यह फैक्टर वस्तु के आकार संरचना आदि की व्याख्या करता है। न्यूटन का नियम सम्पूर्ण या कम्पलीट हो जाता है।

प्रः5 आपने न्यूटन के तीसरे नियम के संशोधन के बारे में ये पुख्ता तथ्य पेश किये है। अमेरिकन एसोसियन आफ फिजिक्स टीजर्च, इंडियन साइंस, कांग्रेस और अन्य वैज्ञानिकों ने इन प्रयोगों को करने की सलाह दी हैं इन प्रयोगो की सफलता से विज्ञान का आधार हिलेगा ऐसे महत्त्वपूर्ण प्रयोग क्यों नही हो रहे है ?

अजय शर्माः 18 जून 2015 को माननीय सांइस एड टैक्नोलॉजी मंत्री डा० हर्ष वर्धन ने मेरी पुस्तकों व रिसर्च पेपर The National Academy of Sciences को भेजे है। लम्बे समय के बाद भी कमेटी की रिपोर्ट का इन्तजार है।

मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सांइस एड टैक्नोलाॅजी मंत्री डा हर्षवर्धन, मुख्यमंत्री हि.प्र. श्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे प्रयोगों की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।

इन प्रयोगो पर 8-10 लाख रुपये खरच होंगे . जबकि इसरो के गगनयान का खर्च 10-12 हज़ार करोड़ रुपये है,

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अजय शर्मा
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