सांसदों और विधायकों के खिलाफ -नई फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के लिए कानून बनाने पर विचार

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सरकार से सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए नई फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के लिए कानून बनाने पर विचार करने को कहा.

शीर्ष अदालत की पीठ को सीबीडीटी द्वारा देशभर के सात लोकसभा सदस्यों और 98 विधायकों के नाम दिए गए हैं जिनकी संपत्तियों में दो चुनावों के बीच बहुत बढ़ोतरी देखी गई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने इन नेताओं के नाम पढ़े हैं और वह इस मुद्दे पर गौर करेगी.

क्या कहा कोर्ट ने…
पीठ ने कहा कि संसद के पास सांसदों के खिलाफ मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए इन अदालतों के गठन हेतु कानून तथा जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करने का अधिकार है.

न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा, ‘सांसदों और विधायकों के संबंध में, यह संसद के दायरे में आता है. कानून बनाने के लिए उसके पास जरूरी अधिकार है. कानून बनाइए और जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार कीजिए.’

पीठ ने कहा कि विधानसभा और संसद नए कानून बना रहे हैं जो अलग तरह के अधिकार और दायित्व पैदा करते हैं जिसके कारण अदालतों के सामने और मामले आते हैं.

अदालत ने कहा, ‘कुछ खास न्यायाधिकरणों को छोड़कर, कोई नई अदालत नहीं गठित हुई है. आप (केन्द्र) नई अदालतें और आधारभूत ढांचा तैयार करें क्योंकि फिलहाल भारत सरकार (न्यायिक प्रणाली पर) बजट का केवल एक या दो प्रतिशत खर्च कर रही है.’

पीठ ने कहा कि इससे लंबित मामलों की संख्या में भी कमी आएगी.

अदालत ने ये टिप्पणियां एनजीओ ‘लोकप्रहरी’ द्वारा दायर याचिका पर कीं जिसमें उन उम्मीदवारों की जांच के लिए स्थायी तंत्र तैयार करने का अनुरोध किया गया जिनकी विधायकों या सांसदों के रूप में कार्यकाल के दौरान संपत्ति आय से अधिक बढ़ी.