विश्व को शून्य और दशमलव भारतीय विज्ञान की देन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने विज्ञान भवन में ‘भारतीय वांग्मय में विज्ञान एवं तकनीकी : अनुसंधान एवं अनुशीलन” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में कहा कि शून्य और दशमलव दुनिया को भारतीय विज्ञान की देन है। संगोष्ठी का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा दिया गया ज्ञान पूर्णत: वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित है। जल के शुद्धिकरण के लिये नदियों में सिक्के डालने की परम्परा हो या 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाले पीपल के वृक्ष की पूजा करने का विधान हो। इस तरह के अनेकों उदाहरण हमारी संस्कृति की वैज्ञानिक सोच को साबित करते हैं।

उन्होंने कहा कि चाहे यह सब प्रयोगशालाओं में नहीं हुआ हो, लेकिन ऋषि-मुनियों की सतत तपस्या और अनुभवों पर आधारित ज्ञान का मूल विज्ञान ही है। श्री शर्मा ने मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद संस्थान में संस्कृत सहित अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य में मौजूद वैज्ञानिक तथ्यों के शोध के लिये दो कक्ष आवंटित किये जाने के लिये कहा है।

उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था, जिसकी संस्कृत भाषा जितनी अच्छी होगी, उसकी गणित भी उतनी अधिक अच्छी होगी। श्री शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के निष्कर्ष समाज को आगे बढ़ने के लिये उपयोगी सिद्ध होंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। इस अवसर पर परिषद के महानिदेशक प्रो. नवीन चन्द्रा, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. भास्कर चौबे, ऑर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया के पूर्व महानिदेशक प्रो. तिवारी और हिन्दी विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रो. सुनील कुमार पारे भी मौजूद थे।