विज्ञान मे न्यूटन की मूर्ति पूजा कब तक ? और क्यों ?—स्वतंत्र शोधकर्ता अजय शर्मा

इग्लैंड के वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन को विज्ञान में भगवान से भी बड़ा दर्जा हासिल है। उनके गति के तीन नियम नहीं, तीन मंत्र है जो पिछले 312 वर्षों में विश्वभर में विज्ञान का आधार है। लेकिन हिमाचल के स्वतंत्र शोधकर्ता अजय शर्मा न्यूटन के तीन नियमों पर पिछले 35 वर्षो से शोध कर रहे हैं।
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वे वैज्ञानिक आधार पर इन्हें झुठला चुके हैं या संशोधन कर चुके हैं ।

French scientist Renne Descartes, in 1644 in his book the Principles of Philosophy gave three laws of motion. In 1686 i.e. 42 years after Newton in his book The Principles of Mathematical Philosophy , gave three laws of motion( like Renne Descartes) .

इस विषय पर हमने अजय शर्मा से बात की।

न्यूटन की गति का दूसरा नियम

प्र 1. अजय जी ! आप किस आधार पर कह रहे हैं कि न्यूटन ने गति का दूसरा नियम F=ma अर्थात Force = mass x acceleration के रूप में नहीं दिया था। यह विश्व के 220 देशों में हर स्कूल में न्यूटन के नाम से पढ़ाया जाता है।

अजय शर्मा : न्यूटन ने गति का दूसरा नियम F=ma के रूप में अपनी महानतम कृति ’प्रिसीपिया’ 1986 या अन्य किसी डाक्यूमैंट में नहीं दिया था। इस तरह F=ma का श्रेय न्यूटन को देना सरासर गलत है।

प्र 2. तो यह नियम अर्थात F=ma किसने दिया था ?

अजय शर्मा: वास्तव में यह नियम स्विटजरलैंड के सांइटिस्ट लियोन हार्ड यूलर ने सन् 1775 में अर्थात न्यूटन की मृत्यु के 48 वर्ष बाद दिया था। उस समय यूलर रूस की सैंट पीटरसवर्ग अकादमी में थे।

प्र 3. प्रमाण या प्रूफ के लिए यूलर का शोध पत्र बताएं जिसमें उन्होंने F=ma दिया था ? यह कहां छपा है ?

अजय शर्मा: यह शोधपत्र लैटिन भाषा में सैंट पीटरसबर्ग अकादमी रूस के जरनल ’नोवी कौमैन्टरी’ के पृष्ठ संख्या 222-223 में 1775 में छपा था।

प्र 4. क्या यह शोधपत्र आम जनता के लिए उपलब्ध है ?

अजय शर्मा : जी हां, मैथेमैटिकल एशोसियसन आफ अमेरिका वाशिंगटन की वैबसाइट पर यूलर की शोध संग्रहित या आरचिव किया है। यहां पर इन्डैक्स न. E479 में पृष्ठ 222 पर F=ma स्पष्ट दिया है। कोई भी देख सकता है।

प्र 5. तो यह नियम न्यूटन के नाम कैसे हो गया ?

अजय शर्मा: बड़े वैज्ञानिक गलती भी बड़ी ही करते हैं। यह महज गलती है कि यूलर के नियम F=ma का श्रेय न्यूटन को चला गया। भूल सुधार आवश्यक है ताकि वैज्ञानिक सोच आम जनता में बनी रहे।

न्यूटन की गति का पहला नियम

प्र. 6. आप कहते हैं कि न्यूटन की गति का पहला नियम वास्तव में 2000 वर्ष पहले एरिस्टौटल ;(अरस्तु) और गैलीलियो ने 77 साल पहले दिया था।

अजय शर्माः हां यह सच है। जो नियम पहले ही विज्ञान की पुस्तकों में पढ़ाये जा रहे थे उनका श्रेय न्यूटन को नहीं दिया जा सकता है।

प्र. 7. आप कैसे कह सकते हैं कि न्यूटन की गति के पहले नियम का पहला भाग एरिस्टौटल (अरस्तु) ने दिया था?

अजय शर्माः न्यूटन के पहले नियम का पहला भाग यह है कि जब तक वस्तु पर बाहरी बल (external force) न लगे तब तक यह स्थिर रहती है। इसे स्थिर अवस्था से हटाने के लिए बाहरी बल की जरूरत होती है।

इस बात को तो एरिस्टौटल ने न्यूटन से लगभग 2000 साल पहले ही कह दिया था। इस तरह यह एरिस्टौटल का नियम हुआ न कि न्यूटन की ।

प्र. 8. फिर न्यूटन के पहले नियम का दूसरा भाग गैलीलियो का नियम कैसे हुआ ?

अजय शर्माः न्यूटन की गति के पहले नियम के दूसरे भाग के अनुसार जब कोई वस्तु एक समान गति से चल रही होती है तो वह एक समान गति से ही चलती जाएगी जब तक उस पर बाहरी बल नहीं लगता है।

यह गैलीलियो का जड़त्व (law of inertia) का नियम है। इस तरह न्यूटन के पहले नियम का प्रथम भाग 2000 वर्ष पहले एरिस्टौटल ने दिया था और दूसरा भाग 77 वर्ष पहले गैलीलियो ने। इस प्रकार न्यूटन ने गति का पहला नियम पुस्तकों से संकलित किया है, यह न्यूटन का मौलिक नियम कतई नहीं है।

न्यूटन की गति का तीसरा नियम

Renne Descartes had given third law of motion describing collisions in 1644 i.e. 42 years before Newton in his book The Principles of Philosophy.

प्र 9. न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार हर क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। To every action there is equal and opposite reaction. यह विज्ञान का ही नही बल्कि डेली लाइफ का भी स्थापित नियम है।

अजय शर्माः आपने ठीक कहा । लेकिन नियम की महत्वपूर्ण खामी यह है कि क्रिया और प्रतिकिया या एक्सन या रियक्शन हमेशा बराबर नहीं होते है।

प्र 10. आपका मानना है कि एक्सन और रियक्शन हमेशा बराबर नहीं होते हैं। यह नियम की खामी है। आप इस खामी को आम आदमी को कैसे समझा सकते है ?

अजय शर्मा: मान लिजिये की हमारे पास रबड़, स्प्रिंग और ऊन या स्पंज की समान भार की तीन वस्तुएं है। हम तीनो वस्तुओं को एक मीटर की ऊंचाई से गिराते हैं क्योंकि वस्तुओं के भार बराबर होते हैं तो न्यूटन के अनुसार क्रिया या एक्सन भी बराबर होंगे।

अब हम पहले रबड़ की गेंद को 1 मीटर की ऊंचाई से गिराते हैं। गेंद उछल कर 1 मीटर की ऊंचाई से वापस आती है। इस तरह एक्सन या रियक्शन बराबर होते हैं। इस अवस्था में हमें न्यूटन के नियम से कोई दिक्कत, आपत्ति या आबजैक्शन नहीं है।

दूसरे मामलों में हम स्प्रिंग को 1 मीटर की ऊंचाई से गिराते हैं तो स्प्रिंग 2 मीटर की ऊंचाई तक ऊपर उछलती है। इस तरह प्रतिक्रिया या रियक्शन क्रिया से दुगनी होती है। इस प्रयोग को सुपर इलास्टिक बाल (बाउसिंग बाल) से भी दोहरा सकते हैं।

तीसरे मामलों में हम उसी भार के स्पंज या ऊन के गोले को फर्श पर फैंकते हैं तो यह बिल्कुल ऊपर नही उछलती है। इसका मतलब यह है कि क्रिया तो है पर प्रतिक्रिया या रियक्शन नहीं है।

प्र 11. इससे आपने क्या रिजल्ट निकाला है ?

अजय शर्माः इस तरह इन तीन प्रयोगों में हमने पाया कि एक अवस्था में क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर है, दूसरे में प्रतिक्रिया , क्रिया से ज्यादा है और तीसरी अवस्था में प्रतिक्रिया कम है। इन प्रयोंगो के बारे में किताबों में बिल्कुल व्याख्या नहीं की गई है।

प्र 12. न्यूटन की गति के तीसरे नियम की खामी की वजह क्या है ?

अजय शर्मा: यह नियम वस्तुओं की प्रकृति सरंचना , बनावट, कठोरता, नर्मता, इलास्टिसीटी आदि की पूरी तरह अनदेखी करता है। ये महत्वपूर्ण घटक हैं और न्यूटन के तीसरे नियम में समाहित होने चाहिए।

प्र 13. तो फिर इस समस्या का समाधान क्या है ?

अजय शर्मा: इसके लिए न्यूटन की गति के तीसरे नियम में संशोधन या बदलाब किया गया है। संशोधित नियम के अनुसार क्रिया और प्रतिक्रिया समानुपात में होती है। इस तरह नियम में एक अतिरिक्त घटक या ’कोफिसियन्ट आफ प्रोपोरसनलटी’ आ जाता है। यह फैक्टर वस्तुओं की प्रकृति, संरचना, कठोरता , नर्मता या इलासटिसिटी आदि की व्याख्या करता है।

संशोधित सिद्धांन्त एक लचीला या फलैक्सिबल सिद्धान्त है। इसके मुताबिक क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर हो भी सकते है और नही भी हो सकते है।

सरकार से गुहार
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प्र. 14. आपकी दो पुस्तकें Beyond Newton and Archimedes and Beyond Einstein and E=mc2 विज्ञान एंड टैक्नोलोजी मंत्री डाॅ हर्ष वर्धन ने लगभग पौने तीन वर्ष पहले मूल्यांकन के लिए भेजी है। इसकी क्या स्थिति है?

अजय शर्माः मैं डाॅ हर्ष वर्धन का धन्यवादी हूं कि उन्होंने मेरी पुस्तकें द नैशनल अकादमी आफ सांइटिस्ट इंडिया को पौने तीन साल पहले मूल्यांकन हेतु भेजी है। रिपोर्ट का इन्तजार है।

प्र. 15. अब आप सरकार से क्या चाहते हैं?

अजय शर्माः मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज से आशा करता हूं कि वे इस मुद्दे को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से उठाये।

मेरे शोध कार्य पर खुले सेमिनार हो।

मैं वैज्ञानिकों के प्रश्नों के उत्तर लिख कर दूंगा।

फिर चर्चा को बेवसाइटों पर डाला जाए ताकि दुनिया भर के वैज्ञानिकों को न्यूटन के नियमों की खामियों का पता लग सके।

इस तरह वैज्ञानिक इस चर्चा पर भी कामेंट्स भी कर सकेगें।

अजय शर्मा
Mob. 94184 50899
Email- ajoy.plus@gmail.com

https://www.facebook.com/ajay.pqrs

Important Links —-(i) For Newton’s Principia
https://books.google.co.in/books?id=Tm0FAAAAQAAJ&pg=PA1&redir_esc=y&hl=en#v=onepage&q&f=false
(ii) Mathematical Association of America when Euler ‘s paper giving F=ma is given
http://eulerarchive.maa.org/
(iii) Ajay Sharma’s paper where 3rd law is generalized
http://www.ijera.com/papers/Vol7_issue11/Part-4/N0711047795.pdf
http://physicsessays.org/browse-journal-2/product/1425-5-ajay-sharma-the-principia-s-third-law-of-motion-original-and-generalized-forms.html