लोक अदालत कार्यक्रम—बुजुर्ग मां-बाप को है भरण-पोषण का अधिकार – न्यायधीश श्री नीलम चंद्र सांखला

रायपुर. 13 नवम्बर 2017————हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन भ्रमण पर आए पंचायत प्रतिनिधियों को कानून की जानकारी देने एवं निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री नीलम चंद्र सांखला, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री आनंद प्रकाश दीक्षित एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश उपाध्याय ने योजना के आवासीय परिसर नया रायपुर के उपरवारा स्थित होटल प्रबंधन संस्थान में पंच-सरपंचों को विभिन्न कानूनों की जानकारी दी।
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उन्होंने शासन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को मुहैया कराए जाने वाले निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी बताया। न्यायधीशों ने कहा कि राजीनामा योग्य मामलों को लोक अदालत में सुलझाएं। जागरूकता कार्यक्रम में धमतरी, रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद जिले के करीब 600 पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री नीलम चंद्र सांखला ने कार्यक्रम में कहा कि हमारे देश में सभी लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। इसकी वजह से वे कानूनी सहायता लेने से वंचित रह जाते हैं। इसलिए विधिक साक्षरता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को टोनही कहकर प्रताड़ित करना अपराध है। इसके लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है। न्यायधीश श्री सांखला ने कहा कि गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच दंडनीय अपराध है। हमें बेटे एवं बेटियों को एक समान मानते हुए दोनों को एक जैसा ही सम्मान देना चाहिए।

बुजुर्गों की देखभाल और भरण-पोषण के बारे में चर्चा करते हुए न्यायधीश श्री सांखला ने बताया कि जो बच्चे अपने मां-बाप को बुढ़ापे में अकेला छोड़ देते हैं या अपने घर में रखने से इंकार करते हैं, उन पर भरण-पोषण का मामला बनता है। ऐसी स्थिति में कुटुंब न्यायालय में मामला दर्ज कर बुजुर्गों को उनका अधिकार दिलाया जाता है।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री आनंद प्रकाश दीक्षित ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानून की जानकारी देकर लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जा रहा है। गांवों में प्रचलित सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए कानून की सहायता ली जा सकती है। किसी भी महिला को टोनही कहकर प्रताड़ित या परेशान करने पर सजा का प्रावधान है। इसके लिए लोक अदालत की भी सहायता ली जा सकती है।

विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश उपाध्याय ने कहा कि देश में हर व्यक्ति चाहे वह बच्चा हो, बुजुर्ग हो, महिला हो या पुरुष हो, सब के लिए कानून बनाया गया है। पंच-सरपंच पैरा-लीगल-वालंटियर के रूप में विधिक सेवा से जुड़कर ग्रामीणों को कानून से संबंधित जानकारी दे सकते है। ऐसे वालंटियर्स को भविष्य में कानून संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

श्री उपाध्याय ने कहा कि छोटे-मोटे बहुत से मामलों के निराकरण के लिए लोक अदालत की सहायता ली सकती है। कार्यक्रम में हमर छत्तीसगढ़ योजना के प्रभारी अधिकारी श्री दिनेश अग्रवाल सहित अनेक अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।