य़ू० पी० ए० लोक में आपको नमस्कार –शैलेश कुमार

क्या आपने ऐसी लेख पढ़ी है ??

य़ू० पी० ए० लोक में—-मन मोहनाचार्य निवास करते है. जिन्होंने सारी उम्र कड़ी तपस्या करके गद्दी की विद्या प्राप्त की है. इस दुर्लभ विद्या को स्वंय ए०ओ० ह्युम नहीं जानते थे. नेहरु वंश वधुवाली सभी तरह से लूट मचाने वाले का आप प्राणदायी है.
मनमोहनाचार्य : नेहरुवंश वधुवाली का इस तरह स्तवन करते है.

ये सत्तेश्वरी ! सत्ता सर्वस्वरूपा ,परम सत्ता परमेश्वरी , परम भवान दिल्ली लोक की लौकिकता के अधेश्वरी ! आप अपने प्रभा से राज सत्ता पर बैठने वाले निशाचरों को प्रिय लगने वाले धन भंडार में अपने हस्त से उन्मुक्त होकर दरिद्रता को दूर भगानेवाली, उनके हितों को भारतीय नगरांचलों में देदीप्यमान बनाए रखे . अत: आपको नमस्कार है.

हे! चन्द्र स्वरूपा नेहरुवंश वधुवाली ! आप धनमयी किरणों से परिपूर्ण है, समस्त इमानदार जैसे निशाचरों को दूर भगाने वाले परम सुंदरी अंटोनियो मैयेनो आपकी दया से वार्सटी रेस्टोरेंट और लन्दन में पाकिस्तानी सलमान तासीर के घर की लक्ष्मी के रूप में निवास करनेवाले, आपके लिए उपसाना की भूमि कब से इंतजार में था.

आपकी कृपा दृष्टि यहां की राजकुमार पर पड़ी और राजकुमार धन्य को प्राप्त हुए.आप के सह अंतरंगी सारथी जर्मन स्टीगलर को भी आपने उद्धार कर दिया है.अत: आपको नमस्कार करता हूँ., आपके चरणावस्त्रम् को नमस्कार है।

आप देश में असीम एंव महान धन ज्योति फैलाकर पुष्पांकित से सबो को प्रमोदित करते तथा सत्तानिशाचरों रावण , अहिरावणो को आनंद के समुद्र में उड़ेल देते है.इतना नहीं आप समस्त (५४५) गणों को आनंदित करने में परिपूर्ण है.अत: आपको नमस्कार है.

हे! मंत्रियो के प्राणेश्वरी,आप नम्रता एंव विनय से रहित जन निशाचर जगत को भग्न करने वाले (विपक्षी) है, सबो को अपनी प्राणशक्ति देकर बेईमान भक्षी गणों को संतुष्ट करनेवाले है. आप सदा इसी पावन पथ पर चलते हुए सत्ता के सहायको के उपास्य है. सम्पूर्ण सत्ता (५ वर्ष) जगत को जीवन प्रदान करनेवाले देवी ! आपके विना यह सत्ता कितने घडियो तक की अतिथि है. अत: आपको नमस्कार है.

हे ! देवी श्वरूपा ,सत्तेश्वरी! आप सत्ता के प्रणत जनो के रक्षक है. अमृत ब्रह्मस्वरूप है.सम्पूर्ण यू०पी०ए० की अंतरात्मा पावक ! क्या आपकी पावनशक्ति के विना यह क्षण भंगूर लाभ संभंव है! कदापि नहीं। आपकी किया हुआ नमस्कार प्रतिक्षण शान्ति देनेवाला है।

सत्तेश्वरी आप सम्पूर्ण देश में परम पवित्र है. आप मंत्रियो को सहायता देकर निश्चय ही बाहर से पवित्र है. मगर भीतर से कुछ और है.जिसके कारण आप अस्तांचल में शीघ्र जाने को उद्वेलित है और आगामी चुनाव में सीता की तरह विलीन हो जाएंगी , रामावतार के रूप में सिर्फ मनमोहनाचार्य वियोगित होंगे। अत: आपको सत – सत नमस्कार है।

सदा सब पर दया रखने वाली देवी! आप से यह देश प्रवाहमय है. आप में ही इसका लय है . प्रलय है. अत: मै आपको प्रणाम करता हूँ .

हे! दरिद्र भंजनो मंत्रियो के दरिद्र हरण करने वाली! यंहा आपके सिवा दूसरा कौन है. प्रियदर्शनी इंदिरा की वधुवाली आप सत्ता के परात्पर है.शान्ति क्षमा आदि गुणों से विभूषित आप से बढ़कर दूसरा स्तवन करने योग्य ही नहीं है. अत: आपको नमस्कार है.
हे ! मंत्रियो के कष्ट हरणी देवी! सबके अंतरात्मा में निवास करनेवाली सत्ता स्वरूपा सत्तेश्वरी! आप इन रूपों में (चिदंबरम, प्रणव मुखर जी, दिग्विजय सिंह,अहमद पटेल, मनीष तिवारी आदि) विद्यमान है. सर मनमोहन जी तो साक्षात आपकी ही स्वरुप है.आप के अनेक रूप है.आप यू०पी०ए० के तदनुरूप है.

हे देवी , महादेवी, नेहरुवंश वधूवाली! प्रणत जनों को प्राप्त होनेवाले सम्पूर्ण अर्थ समूहों में आप ही परमार्थ स्वरुप है. आपके चरनार्विन्दो की वंदना करने वाले राक्षसगणो के कारण आपकी पतनोन्मुखी विकास होने वाला है। अत: आप वन्दनीय है। निंदनीय तो अन्ना हजारे रामदेव और देश के भिखारी जनता है. अत: आपको सत -सत नमस्कार है.

इस लेख के माध्यम से कांग्रेस की विदाई 29 सितम्बर,2011, दैनिक जागरण ” भैस ब्लॉग” में मैने वेब किया था बाद में 8 नवंबर, 2014 को जब मैंने वेब साइट लंच किया तो फिर इसे वेब किया था।