भिण्ड जिले में सबसे अधिक लाड़ली

भोपाल :——- राज्य शासन, पीसीपीएनडीटी, कलेक्टर, महिला बाल विकास विभाग के पिछले कुछ सालों से लक्ष्य केन्द्रित निरंतर प्रयास भिण्ड जिले में सुखद परिणाम लेकर आये हैं। जनगणना-2011 के अनुसार भिण्ड मध्यप्रदेश का सबसे कम लिंगानुपात वाला जिला था।

देश ही नहीं एशिया में भी लिंगानुपात में सबसे नीचे रहा यह जिला अब एक नई इबारत लिख रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ वाले जिलों में सबसे अधिक कन्या जन्म भिण्ड जिले में ही हुआ है।

वर्ष 2011 की जन-गणना में भिण्ड में प्रति एक हजार बालकों पर जहाँ मात्र 896 ही बेटियाँ थीं, वह वर्ष 2017 में 929 पहुँच गई हैं।

भिण्ड जिले में वर्ष 2014-15 में 13 हजार 829 बालिकाओं और 15 हजार 50 बालकों का जन्म हुआ। दोनों की जन्म संख्या में 1221 का अंतर था। वर्ष 2015-16 में 14 हजार 547 बालिकाओं के जन्म के विरुद्ध 16 हजार 231 बालकों ने जन्म लिया और दोनों की जन्म संख्या में 1684 का अंतर था।

वर्ष 2016-17 में 13 हजार 797 बालिकाओं के जन्म के विरुद्ध 14 हजार 845 बालकों ने जन्म लिया और दोनों के बीच का अंतर कम होकर 1,048 बचा।

भिण्ड जिले में बेटा-बेटी के भेदभाव को खत्म करने और लोगों को जागरूक करने के लिये समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं कलेक्टर भिण्ड के मार्गदर्शन में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ चौराहों का निर्माण करवाया गया। यह चौराहे वहाँ से गुजरने वालों को मूक नैतिक संदेश देने में सफल रहे हैं।

कलेक्टर के नेतृत्व में पीसीपीएनडीटी की अनिवार्य रूप से नियमित तिथि पर बैठकें हुईं। समीक्षा बैठकों में भी कलेक्टर द्वारा लाड़ली लक्ष्मी योजना के क्रियान्वयन पर विशेष चर्चाएँ की गईं।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा कर मृत्यु के कारणों का विशेष अध्ययन कर ऐसे गाँवों को चिन्हित किया गया, जिनमें बालिकाएँ जन्म के 5 वर्ष तक की आयु तक जीवित नहीं रहती थीं। इन गाँवों पर विशेष ध्यान दिया गया।

वर्ष 2015-16 में भिण्ड के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत भिण्ड में चल रहे अवैध गर्भपात रैकेट का स्टिंग ऑपरेशन कर पुलिस कार्यवाही की गई। मामला न्यायालय में लम्बित है। इस तरह की कार्यवाहियों से अवैध गर्भपात रैकेट पर शिकंजा कसा।

जिले को गौरवान्वित करने वाली बालिकाओं को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रॉण्ड एम्बेसडर बनाया गया। उच्च सेवा में चयनित, खेलों आदि में गौरवान्वित करने वाली इन बालिकाओं के पोस्टर सार्वजनिक-स्थलों पर लगाये गये और कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय केनोइंग-कायकिंग प्रतियोगिताओं में विजेता कु. पूजा ओझा का मुख्यमंत्री के 18 दिसम्बर को भिण्ड आगमन पर सम्मान कराया गया।

भिण्ड के जिला चिकित्सालय में गौरी-कक्ष का निर्माण किया गया, जिसमें बालिका को जन्म देने वाली माताओं का प्राथमिकता के आधार पर आधार-कार्ड बनवाया जाना, प्रसव उपरांत ममता किट की प्रदायगी के साथ जननी सुरक्षा योजना की राशि प्रदायगी के लिये जीरो बैलेंस पर खाता खुलवाया गया।

पुलिस अधीक्षक और जिले के अन्य अधिकारियों ने मेधावी छात्राओं को गोद लेकर आर्थिक सहायता और उनकी उन्नति के लिये जा काम किये, उससे भी समाज में बेटियों के प्रति सम्मान बढ़ा।

कलेक्टर की पहल पर लोक सेवा आयोग एवं संघ लोक सेवा आयोग की पूर्व तैयारी के लिये नि:शुल्क संकल्प कोचिंग शुरू की गई। इसमें बालिकाओं को उच्च सेवाओं की तैयारी के लिये वरीयता एवं प्रोत्साहन दिया गया। बेटियों के लालन-पालन में सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष सतर्कता बरती गई।

नवजात शिशु हत्या के विरुद्ध देश का पहला प्रकरण दर्ज करने वाला जिला

एशिया में जन्म के बाद सबसे अधिक लिंगानुपात अंतर के लिये बदनाम भिण्ड जिले के ग्राम खरौआ के सरपंच रहे श्री रामअख्तिया सिंह गुर्जर ने पूर्व सरपंच श्री सूर्यभान सिंह गुर्जर द्वारा अपनी बेटी को मारे जाने की सूचना पुलिस को दी। देश में यह पहली बार था, जिसमें नवजात शिशु हत्या पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा-302 के तहत पहली बार प्रकरण दर्ज किया गया था।भिण्ड जिले में बालक-बालिका जन्म के अंतर पर एक नजर
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