प्राइवेट स्कूलों पर योगी का आक्रोप– कैपिटेशन फीस बंद—

लखनउ ———- प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए विधेयक का ड्राफ्ट तैयार की गई है.
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उप्र स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का विनियमन) विधेयक, 2017 नाम से सरकार ने जो ड्राफ्ट तैयार किया है.

फीस वृद्धि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया गया है.

स्कूल कैंपस के कॉमर्शियल इस्तेमाल को भी स्कूल की आमदनी माना गया है.

ड्राफ्ट में अभिभावकों की शिकायतों के लिए जोनल शुल्क विनियामक समिति के गठन का भी प्रस्ताव है.

मुख्यमंत्री ने कहा हमारी कोशिश है कि ऐसा प्रस्ताव तैयार किया जाए, जिसमें छात्रों के हितों की रक्षा हो साथ ही स्कूलों को भी कुछ भी गलत न लगे.

ड्राफ्ट की खास बातें

– प्रस्तावित विधेयक विभिन्न बोर्ड के उन प्राइवेट स्कूलों के लिए है, जो छात्रों से 20 हजार से अधिक वार्षिक शुल्क लेते हैं.

– निजी स्कूलों में हर साल फीस वृद्धि का आधार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक होगा.

– स्कूल कक्षावार छात्रों की संख्या के आधार पर ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में फीस का 5 प्रतिशत जोड़ते हुए शुल्क वृद्धि कर सकेगा.

– शिक्षकों, कर्मचारियों की मासिक वेतन में हुई वृद्धि के औसत से अधिक फीस वृद्धि नहीं होगी.

– स्कूल कैंपस में व्यावसायिक गतिविधियों से कमाई स्कूल की आमदनी मानी जाएगी.

– फीस में बढ़ोतरी आय और व्यय के समानुपाती होगी.

– छात्रों से एडमीशन फीस सिर्फ कक्षा 1 में दाखिला लेने पर ही लिया जाएगा. इसके बाद कक्षा 9 और 11 में ही छात्रों से एडमीशन फीस लिया जा सकेगा.

– कैपिटेशन फीस नहीं ली जाएगी.

– फीस का अधिकतम 15 प्रतिशत स्कूल के विकास कार्यो पर खर्च किया जा सकता है.

– स्कूलों को आगामी सत्र की फीस 31 दिसंबर तक अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी.

– छात्र, अभिभावक या अभिभावक संघ की शिकायतों के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में जोनल शुल्क विनियामक समिति का गठन किया जाएगा.

– इस समिति के फैसले से असहमति होने पर पक्षकार राज्य स्ववित्तपोषित विद्यालय प्राधिकरण में अपील कर सकेंगे.