पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग की समीक्षात्मक बैठक की

पटना, 07 सितम्बर 2017:-(लोकेश कुमार झा)———- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक की। समीक्षा बैठक में संबंधित विभाग के सभी बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी। समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को आवष्यक दिषा-निर्देष दिये गये।

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मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार— पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग की समीक्षा बैठक

समीक्षा बैठक के उपरांत मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आज दो विभागों की समीक्षा की गयी। 2022 तक बिहार के कुल क्षेत्रफल का 17 प्रतिषत हरित आवरण प्राप्त करना है। उन्होंने बताया कि हमें यह बताते हुये खुषी हो रही है कि हमलोग इस लक्ष्य के नजदीक पहुॅच चुके हैं और आज हमारा हरित आवरण 15 प्रतिषत के आसपास हो चुका है।

उन्होंने कहा कि राजगीर के जंगल क्षेत्र में पाये जाने वाले स्थानीय बाॅस को लगाया जाना चाहिये। बैठक में निर्णय हुआ कि पथों के किनारे वृक्षारोपण का स्थिति का आंकलन स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाय। मनरेगा तथा उद्यान विभाग द्वारा भी वृक्ष लगाया जाता है, उसकी भी उपलब्धि को हरियाली मिषन की उपलब्धि के साथ जोड़ा जाय।

गंगा में पाये जाने वाले डाॅलफिन को देखने के लिये सुल्तानपुर में बनने वाले गंगा सड़क पुल में स्थल का उपर्युक्त चुनाव किये जाने का निर्णय लिया गया, जहाॅ से पर्यटकों को डाॅलफिन दिखाया जा सके। उन्होंने बताया कि नालंदा में सर्वे में कुल औषधीय पौधों की कुल 21 एवं वृक्ष की 106 प्रजातियाॅ पायी गयी। उक्त क्षेत्र में और प्रजातियों की संभावना है। बैठक में यह निर्णय हुआ कि सर्वे कराकर स्थिति का आकलन किया जाय।

बैठक में यह निर्णय हुआ कि भीम बाॅध में गर्म पानी के स्रोत के आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जाय ताकि पानी का समुचित उपयोग हो सके। यह क्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये भी उपयोगी होगा। गंगा में सीवर ट्रिटमेंट प्लांट द्वारा पानी को नहीं छोड़ा जायेगा बल्कि उसका उपयोग वानिकी एवं अन्य कार्यों में किया जायेगा। सभी संबंधित विभाग यथा- नगर विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, लघु सिंचाई विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग इस संबंध में विचार-विमर्ष करेंगे।

पटना में वायु प्रदूषण दूर करने के लिये सी0एन0जी0 के प्रयोग के संभावनाओं पर विचार किया जाय तथा इसे लागू किया जाय। षिक्षा विभाग के सहयोग से बिहार के सभी विद्यालयों में वृक्ष सुरक्षा दिवस एवं बिहार पृथ्वी दिवस का विस्तार किया जाय। पर्यावरण एवं वन विभाग में इको-टूरिज्म तथा पार्क के लिये अलग प्रभाग स्थापित किया जाय। अघौरा-अकबरपुर रोड को तत्काल ।सस ूमंजीमत रोड बनाया जाय।

सूचना प्रावैधिकी विभाग की बैठक के संदर्भ में मुख्य सचिव ने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा बड़े पैमाने पर सीधे राषि हस्तांतरित की जा रही है। उदाहरण देते हुये उन्होंने बताया कि षिक्षा विभाग द्वारा लगभग डेढ़ करोड़ बच्चों को छात्रवृति, पोषाक, साइकिल इत्यादि के लिये राषि हस्तांतरित की जा रही है, उसी प्रकार सामाजिक सुरक्षा पेंषन के अन्तर्गत पूरे राज्य में लाभार्थियों को सीधे खाते में राषि हस्तांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है। आधार का भी काम हो रहा है।

अतः इस संदर्भ में यह निर्णय लिया गया कि बिहार में सूचना प्रावैधिकी के विस्तार का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रावैधिकी की मुख्य एजेंसी बेल्ट्राॅन है और बेल्ट्राॅन की कैपिसिटी बढ़ाने का निर्णय लिया गया और यह भी निर्णय लिया गया कि सभी विभागों के सूचना प्रावैधिकी से संबंधित कार्य बेल्ट्राॅन के मार्गदर्षन में हों। साथ ही डाटा सिक्युरिटी को भी मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया।

मुख्य सचिव ने बताया कि सात निष्चय के अन्तर्गत काॅलेजों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करायी जानी थी। 306 काॅलेजों में सुविधा पहुॅच गयी है, लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। यू0 ट्यूब और वाट्सएप तक इस सुविधा का विस्तार करने हेतु विचार किये जाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि राज्य में राजगीर में सौ एकड़ तथा बिहटा में 25 एकड़ जमीन सूचना प्रावैधिकी विभाग को दिया गया है। 14 सितम्बर को एक काॅनक्लेव का आयोजन किया गया है, जिसमें निवेषक आमंत्रित किये गये हैं।

समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री सह पर्यावरण एवं वन तथा सूचना प्रावैधिकी मंत्री श्री सुषील कुमार मोदी, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त श्री षिषिर सिन्हा, प्रधान सचिव पर्यावरण एवं वन श्री विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीष चन्द्रा, सचिव सूचना प्रावैधिकी श्री राहुल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के विषेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित पर्यावरण एवं वन विभाग तथा सूचना प्रावैधिकी विभाग के अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।