नेशनल हैण्डलूम एक्सपो में बंगाल की संस्कृत

जयपुर———– 11 फरवरी से अमरुदों के बाग पर चल रहे नेशनल हैण्डलूम एक्सपो में बंगाल की संस्कृति साकार हो रही है। एक्सपो में बंगाल की तीन बुनकर सहकारी समितियों की स्टॉलों में शांति निकेतन की कांथा हैण्डवर्क, टसर सिल्क, पारसी वर्क, हैण्डलूम और खादी कॉटन के आइटमों को खूब पंसद किया जा रहा है।

पं. बंगाल की गोलापारा हैण्डलूम सोसायटी की प्रतिनिधि पियाली सरकार ने कांथा वर्क की जानकारी देते हुए बताया कि शांतिनिकेतन में गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर के समय से यह हैण्डलूम डिजाइन विकसित की गई है और इसमें पूरा काम हाथ से होता है।

कांथा हैंडवर्क में टेंपल टच देखा जाता है वहीं बंगाल में साड़ी पर उल्लू के डिजाइन को लक्ष्मी का प्रतीक मानते हुए खूब पसंद किया जाता हैं पारसी वर्क में फ्लोरल टच होता है वहीं तांत की साड़ियों में बुनाई में ही डिजाइन दी जाती है।

जरी बोर्डर की बंगाली साड़ियां और खादी कॉटन व हैण्डलूम की साडियां भी जयपुरवासियों को पसंद आ रही है। कांथा वर्क की साड़ियां 800 से 5400 की रेंज में हैं वहीं पारसी वर्क की साड़ियां 800 से 6400 की रेंज में, हैण्डलूम बहाव की साड़ियां 900 से 18 हजार की रेंज की मेेले में प्रदर्शित की गई है।

खादी कॉटन में गमछा चैक की साड़ियां एक हजार की रेंज में है। बंगाल के ड्रेस मेटेरियल व सूट पीस आदि 200 से 900 की रेंज में उपलब्ध है। पियाली ने बताया कि हैण्डलूम एक्सपो में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

नेशनल उद्योग एक्सपो का केन्द्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजन किया गया है और राजस्थान सहित दस प्रदेशों की बुनकर समितियां इस एक्सपो में अपने हैण्डलूम उत्पाद प्रदर्शित कर रही है।

एक्सपो में बुनकर संघ, राजस्थान हैण्डलूम, रुडा और ट्राइफैड के परिधानों को भी उत्साहजनक रेस्पांस मिल रहा है।

उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक एसएस शाह ने बताया कि एक्सपो में 60 पेवेलियनों में देश का हैण्डलूम समाहित है। चिम्मन लाल वर्मा ने बताया कि अवकाश का दिन होने से एक्सपो में अच्छी खरीदारी देखी गई।

एक्सपो में निधी शर्मा, रवीश कुमार, सुभाष शर्मा, रवि गुप्ता, डीएन माथुर, त्रिलोक, अशोक शर्मा आदि की टीम समन्वय कर रही है।