नीति आयोग—5 वर्ष में किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प

भोपाल (आनंद मोहन गुप्ता)———–मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में 5 साल में किसानों की आय को दोगुना करने के रोड मेप का प्रेजेंटेशन दिया। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की। बैठक में विभिन्न राज्य के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश में 18 फरवरी, 2016 को ग्राम शेरपुर जिला सीहोर के कार्यक्रम में अगले 5 वर्ष में किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प सभी राज्यों को दिया। मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले किसानों की आय को दोगुना करने का रोड मेप तैयार कर अप्रैल-2016 से

नीति आयोग--प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ,मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान.

नीति आयोग–प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ,मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान,श्री मनोहर लाल खट्टर,डा० रमन सिंह,मेहबूबा मुफ्ती तथा बंगाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री को छोडकर सभी राज्यों के क्षत्रप शामिल

उस पर अमल शुरू कर दिया था।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रेजेंटेशन में जानकारी दी कि रोड मेप के अंतर्गत मध्यप्रदेश में मूलरूप से 5 घटकों को आधार स्तम्भ मानते हुए कार्य शुरू किया गया है। इन आधार स्तम्भों में पहला कृषि लागत में कमी, दूसरा उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि, तीसरा कृषि विविधिकरण, चौथा कृषि उत्पाद का बेहतर मूल्य उपलब्ध करवाना तथा खाद्य प्र-संस्करण और पाँचवां कृषि क्षेत्र में आपदा प्रबंधन शामिल है।

इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये प्रदेश में गठित देश की पहली कृषि केबिनेट द्वारा सघन मॉनीटरिंग की जाती है। किसानों की आय 5 वर्ष में दोगुनी करने के संकल्प की पूर्ति के लिये राष्ट्रीय स्तर के कृषि विशेषज्ञों की 5 सदस्यीय राज्य टॉस्क फोर्स गठित की गयी है। कृषि मंत्री की अध्यक्षता में 51 प्रगतिशील कृषकों की कृषि सलाहकार समिति का गठन किया गया है। रोड मेप की इन सभी गतिविधियों को जन-सहभागी बनाये जाने पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही राज्य में सूक्ष्म सिंचाई मिशन एवं कृषि वानिकी मिशन का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में प्रदेश के सभी 51 जिलों के सिंचाई प्लान स्वीकृत कर युद्ध-स्तर पर अमल प्रारंभ किया गया है। इसके अलावा 5 लाख अस्थाई कृषि पम्पों को स्थायी करने के लिये 5000 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गयी है। मनरेगा को किसान केन्द्रित करने के उद्देश्य से ‘मेरा खेत-मेरी माटी” उप-योजना तैयार कर किसानों के खेतों पर ऑन फार्म तथा ऑफ फार्म निर्माण कार्य युद्ध-स्तर पर शुरू किये गये। नई 265 मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशालाएँ स्वीकृत कर उनका निर्माण प्रारंभ किया गया। प्रत्येक संभाग पर एक-एक उर्वरक परीक्षण तथा बीज परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना का कार्य पूरा होने को है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रेजेंटेशन में बताया कि कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में किसानों की आय को दोगुना करने के लिये 19 बिन्दु पर कार्य किया जा रहा है। इनमें शासकीय स्रोतों से सिंचाई का विस्तार, कृषि के लिये अधिक विद्युत की उपलब्धता, बिना ब्याज फसल ऋण, कृषि क्षेत्रफल का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, कृषि का विविधिकरण, उन्नत बीजों का प्रसार, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि तकनीकी विस्तार के नये आयाम, फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों का गठन, उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार, जैविक खेती का प्रसार, कृषि क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, कृषि उत्पादन भण्डारण सुविधाओं का विस्तार, कृषि विपणन का सुदृढ़ीकरण, पशुपालन, मत्स्य-पालन, रेशम-पालन/बाँस/वनोपज उत्पादन और संस्थागत ढाँचे का गठन शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रेजेंटेशन में जानकारी दी कि संस्थागत ढाँचे के अंतर्गत कृषि केबिनेट का गठन, हर साल पृथक से कृषि बजट को पारित किया जाना, टॉस्क फोर्स का गठन, कृषक आयोग का गठन और सूक्ष्म सिंचाई तथा कृषि वानिकी मिशन के गठन जैसे नवाचार शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट कार्य कर पाँच वर्ष लगातार प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त किया है। राज्य को वर्ष 2011-12, 2012-13, 2014-15 में तीन बार सम्पूर्ण खाद्यान्न में तथा 2013-14 एवं 2014-15 में गेहूँ में उत्कृष्ट कार्य के लिये कृषि कर्मण पुरस्कार प्रदान किया गया है। राज्य ने विगत पाँच वर्ष में औसतन 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष की कृषि विकास दर प्राप्त की है। मध्यप्रदेश दलहन, तिलहन, सोयाबीन, चना, मसूर, उड़द, टमाटर, अमरूद, लहसुन, जैविक कृषि उत्पाद में देश में अग्रणी राज्य है। गेहूँ, अरहर, राई-सरसों, धनिया, संतरा, हरी मटर उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।