देशी-विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बना राजस्थान -उद्योग एवं राजकीय उपक्रम मंत्री

जयपुर, 7 दिसम्बर। उद्योग एवं राजकीय उपक्रम मंत्री श्री राजपाल सिंह शेखावत ने कहा कि राज्य सरकार के समन्वित, आक्रामक व योजनाबद्ध प्रयासों से आज देश में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में राजस्थान देशी-विदेशी निवेशकों की पहली पंसद बन गया है।
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उन्होंने कहा कि विगत चार सालों में प्रदेश मेंं आधा दर्जन से अधिक मल्टीनेशनल कंपनियाें हीरो मोटोकार्प, जेसीबी, होण्डा कारस, सेंट गोबेन, परटों, श्री बल्लभ पित्ती समूह, आरएसड्ब्लूएम आदि ने उद्योग स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि जापान सरकार के आग्रह पर प्रदेश में घिलोट में दूसरा जापानी जोन विकसित किया गया है। राज्य में नीमराना व अजमेर के सिंघाना में सिरेमिक पार्क विकसित हो रहे हैं।

उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री गुरुवार को उद्योग भवन मेें सरकार के चार वर्ष के अवसर पर मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के अनवरत प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिसर्जेंट राजस्थान के दौरान किए गए निवेश के एमओयू को धरातल पर उतारने में समूचे देश में राजस्थानअग्रणीरहा है।

रिसर्जेंट राजस्थान में प्राप्त 3.38 लाख करोड़ रु. के निवेश प्रस्तावों में से 2.02 लाख करोड़ रु. की परियोजनाओं पर निवेशाधीन है। उन्होेंने बताया कि निवेश प्रस्तावों के रुपांतरण में राजस्थान ने 60 प्रतिशत की दर हासिल की है जोकि अपने आप में कीर्तिमान है।

शेखावत ने बताया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए लागू राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2014 का लाभ प्राप्त करते हुए प्रदेश में 2204 उद्यमियों द्वारा 44 हजार 500 करोड़ रु. का निवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि गत माह ही नई दिल्ली में आयोजित वल्र्ड फूड इण्डिया में पार्टनर स्टेट के रुप में हिस्सा लेते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 540 करोड़ रु. के विनियोजन के एमओयू किए गए हैं।

शेखावत ने बताया कि इज आफॅ डूइंग बिजनस क्षेत्र में भी राजस्थान देश के लीडर प्रदेशों की श्रेणी में शामिल है। 13 विभागों की 69 सेवाएं ऑन लाईन उपलब्ध कराई जाने लगी है। प्रगतिशील श्रम सुधारों के जरिए राजस्थान ने देश को एक नई राह दिखाई है।

शेखावत ने बताया कि विगत चार सालों में राज्य में 25 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए हैं। रीको द्वारा 12,479 एकड़ भूमि अवाप्त कर 4,658 एकड भूमि विकसित की है। उन्होंने बताया कि देश में सबसे बड़े औद्योगिक भूमि बैंक स्थापित करने वाले प्रदेशों में से राजस्थान एक है।

राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर 2594 करोड़ रु. व्यय किए गए हैं। अलवर के सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में इलेक्ट्रोनिक सिस्टम डिजाइन एण्ड मेन्यूफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन फिल्ड इलेक्ट्रोनिक मेन्यूफेक्चरिंग कलस्टर विकसित किया जा रहा है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि केन्द्र सरकार के यूएएम पोर्टल पर 2 लाख 23 हजार 431 लघु, सूक्ष्म एव मध्यम उद्योग पंजीकृृत हुए हैं। उद्यमियों की स्वघोषणा के अनुसार इन उद्यमों में 31 हजार 257 करोड़ का पूंजी विनियोजना व 11 लाख 82 हजार युवा रोजगार से जुड़ पा रहे हैं।

शेखावत ने बताया कि राजस्थान की टेक्सटाइल इण्डस्ट्री को फाइबर से फैशन तक पंहुचाने के लिए इंटरनेशनल एक्जिविशन ‘‘वस्त्रा’’ का आयोजन कर इसकी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच व पहचान बनाई गई। उन्होंने बताया कि वस्त्रा में 55 मिलियन डॉलर मूल्य का कारोबारी अंतरण हुआ। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार स्टोनमार्ट का आयोजन कर राजस्थान के समृद्ध पत्थर उद्योग की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग को नई ताकत दी गई है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार लघु, सूक्ष्म एवं मध्य उद्योगों को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए इस वर्ष 17 सितंबर को एमएसएमई वर्ष के रुप में मनाने की घोषणा की गई है। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एमएसएमई पखवाड़ें में 6179 औद्योगिक प्रोत्साहन शिविरों का आयोजन कर सीधा संवाद कायम किया गया है।

प्रदेश में पहलीबार 5 उद्यमियों को उद्योग रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया वहीं एक शिल्पी और एक बुनकर को पुरस्कृत किया गया। उन्होंने बताया कि उद्यमों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा व प्रोत्साहन की दृष्टि से 55 निर्यातकों को निर्यात पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उद्योग मंत्री ने बताया कि विगत चार सालों में आरएफसी द्वारा 1131 करोड़ का ऋण स्वीकृत कर 795 करोड़ रु. का ऋण वितरित कर 19800 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। आरएफसी द्वारा ही उद्यमिता प्रोत्साहन योजना में 5 करोड़ रु. तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें डेढ़ करोड़ रु. तक के ऋण पर 6 प्रतिशत ब्याज सबवेंशन दिया जा रहा है। 210 उद्यमियों को ऋण दिया गया है।

रीको ने 731.19 करोड़ रु. के ऋण स्वीकृत कर 638 करोड़ रु. के ऋण वितरित कर दिए गए हैं। आरएफसी की प्रक्रिया को सरल करते हुए रीको औद्योगिक क्षेत्रों में होटल एवं हॉस्पिटल के लिए भी ऋण दिए जाने लगे हैं वहीं प्रोसेसिंग फीस में 50 प्रतिशत की कमी कर राहत दी गई है।

शेखावत ने बताया कि भामाशाह रोजगार सृजन योजना में ब्याज अनुदान को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। चार सालों में 13751 आवेदकों को 200 करोड़ रु. का ऋण उपलब्ध कराया गया है। पीएमईजीपी योजना में 7721 उद्यमियों को ऋण दिया गया है। खादी निर्माण में 38391और ग्रामोद्योग में 14071 व्यक्तियों को रोजगार दिया गया।

रुडा द्वारा 11 हजार दस्तकारों को कौशल उन्नयन क्षमतावद्र्धन प्रशिक्षण और विपणन गतिविधियों से लाभान्वित किया गया। गृह उद्योग योजना में 7553 और उद्यमिता विकास योजना में 5071 व्यक्तियाें को प्रशिक्षित किया गया। उद्योग मंत्री श्री शेखावत ने बताया कि राज्य में क्वालिटी वर्कफोर्स तैयार करने के लिए देशी-विदेशी कंपनियों का प्रदेश के आईटीआई केन्द्रों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

सिंगापुर सरकार के सहयोग से उदयपुर में प्रशिक्षण सुविधा शुरु कर दी गई है। माइकोबॉश, एशियन पेंट, एल एण्ड टी जैसी विश्वस्तरीय कंपनियों से समन्वय बनाकर युवाओं को प्रशिक्षित करवाया जाएगा।

उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य में रिफाइनरी की स्थापना में प्रदेश के हितों का खास ध्यान रखा गया और कम लागत और अधिक लाभ का समझौता किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की स्थापना से एक मोटे अनुमान के अनुसार आने वाले दस वर्षों में 34 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि गैरपरंपरागत उर्जा क्षेत्र सोलर पॉवर में देश मेंं अत्यधिक निवेश राजस्थान में होने जा रहा है। नोन कंवेशनल पॉवर सेक्टर में करीब एक लाख 23 हजार करोड़ रु. की 6 परियोजनाओं पर काम हो रहा है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य में निवेश प्रोत्साहन के लिए औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास के लिए विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) अधिनियम 2016 में लागू कर दिया गया है और जल्दी ही रीजनल डवलपमेंट ऑथोरिटी तथा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

शेखावत ने बताया कि कारपोरेट सोशियल रेस्पांस्बिलिटी के तहत 124 परियोजनाओं के माध्यम से 407 करोड़ रु. के व्यय होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सीएसआर पोर्टल लांच कर कंपनियों व गतिविधियों को अपलोड किया जा रहा है।

राजस्थानी हैण्डिक्राफ्ट, दस्तकारों और बुनकरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए राजस्थली के माध्यम से प्रयास किए जाने के साथ ही मेलो प्रदर्शनियों का आयोजन, बी2बी, बी2सी, वेंडर डवलपमेंट प्रोग्राम आदि नियमित आयोजित किए जा रहे हैं ताकि प्रदेश के आर्टिजन लाभान्वित हो सके। हेरिटेज वीक के तहत खादी बोर्ड द्वारा आज से जयपुर में फैशन शो का आयोजन किया जा रहा है।

कोटा डोरिया, लेदर, टाई एण्ड डाई आदि के कलस्टर विकसित किए गए हैं। सही दिशा में किए जा रहे निरंतर सोचे समझे प्रयासों से आगामी वर्षों में प्रदेश के औद्योगिक विकास के नए आयाम पैदा करते हुए राष्ट्रीय औद्योगिक पटल पर अपनी अलग छाप छोड़ने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब एक अति समृृद्ध राजस्थान का अवतरण आंखों के सामने दिखने लगा है।