दहेज प्रथा पर कडी नजर –21 जनवरी 2018 मानव श्रृंखला से जागरुकता

मधुबनी (सुरेश कुमार सुमन) मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार ने राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी की 148वीं जयंती पर सम्राट अषोक कन्वेंषन केन्द्र पटना के नवनिर्मित बापू सभागार का लोकार्पण किया और दहेज एवं बाल विवाह के खिलाफ महाभियान की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने बापू सभागार परिसर में विभिन्न जिलों के स्कूली बच्चों द्वारा निर्मित चित्रों की प्रदर्षनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम का मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।
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मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिये जागरूकता सामग्री एवं सी0 डी0 का लोकार्पण किया, जो महिला विकास निगम के द्वारा दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ तैयार किया गया था। साथ ही मुख्यमंत्री ने जागरूकता अभियान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक मोबाइल एप्प भी लाॅच किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी के छात्र-छात्राओं के बीच बापू के आदर्षों को पहुॅचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी समारोह जोर-षोर से मनाया जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गाॅधी जी का संदेष जन-जन तक पहुॅचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू किया गया, ये भी बापू के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है।

महिलाओं की आवाज पर हमने ये निर्णय लिया। चंद लोग शराब को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ जोड़कर देखते हैं, जबकि उन्हें इस बात की कल्पना नहीं होती है कि बहुत लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा शराब में गंवा देते थे।

उन्होंने शराबबंदी को लेकर कहा कि कई लोग इसे स्वतंत्रता और निजी अधिकार के साथ जोड़ते हैं जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई दफा इसे लेकर स्पष्ट कहा है कि शराब का सेवन एवं व्यवसाय करना मौलिक अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने की प्रवृति कुछ लोगों में होती है,कुछ धंधे बाजी में लगे हुये हैं, कितना भी कानून बनाइये उनकी प्रवृति कानून उल्लंघन की ही रहती है, इन पर सख्त नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ मुहिम में आम जनता का अपार समर्थन मिला है। शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलता रहेगा। लोगों को जागरूक किया जाता रहेगा।

गड़बड़ी करने वालों पर नजर रखनी होगी। ऐसा न हो कि शराब की जगह दूसरी नषीली वस्तु का सेवन न करने लगें। उन्होंने कहा कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। उन्होंने इस सामाजिक अभियान के जारी रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ 21 जनवरी 2017 को जो मानव श्रृंखला बनी थी, उसमें चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था जो कि लगभग बिहार की आबादी का एक तिहाई हिस्सा था। लगभग चार करोड़ लोग इस श्रृंखला में शामिल हुये, जो जन भावना का प्रकटीकरण था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज एवं बाल विवाह एक बड़ी सामाजिक कुरीति है, जिसे जड़ से मिटाना जरूरी है। हमलोगों ने नारी सषक्तिकरण के लिये काफी उपाय किये हैं, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिषत आरक्षण देने पर काम किया गया। हमने 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में और 2007 में नगर निकायों में आधी आबादी के बराबर उन्हें पचास प्रतिषत आरक्षण दिया। उसके बाद हमने प्राथमिक षिक्षकों के नियोजन में भी पचास प्रतिषत आरक्षण महिलाओं को दिया। लड़कियों में अशिक्षा के सबसे बड़े कारणों में से एकगरीबी है।

अभिभावक पोषाक की कमी के कारण लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते थे, इसके लिये हमने मिडिल स्कूल में पढ़ रही बालिकाओं के लिये बालिका पोषाक योजना शुरू की, इससे मध्य विद्यालयों में लड़कियों की संख्या बढ़ी। इसके बाद हमने 9वीं कक्षा की लड़कियों के लिये बालिका साइकिल योजना की शुरूआत की। पहले पटना में भी लड़कियों को साइकिल चलाते हुये नहीं देखा जाता था, गाॅव में पहले जो लड़की साइकिल चलाते दिख जाती थी तो ये कहा जाता था कि लड़की हाथ से निकल गयी। आज घर-घर से लड़कियाॅ साइकिल चलाकर स्कूल जाती हैं।

अब लोगों की सोच बदल गयी, उनमें प्रसन्नता आयी है। जिस समय यह योजना शुरू की गयी थी, उस समय 9वीं कक्षा में लड़कियों की संख्या 1 लाख 70 हजार से भी कम थी, जो आज 9 लाख 40 हजार तक पहुॅच गयी है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी हमने काम किया है। अस्पतालों में प्रसव पहले 4 प्रतिषत होता था, जो हमारे अनेक योजनाओं के चलाने के बाद 50 प्रतिशत तक हो गया है। शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर में कमी आयी है। हमारा सारा प्रयास नारी सशक्तिकरण के लिये है। इसके लिये 7 निष्चय में से एक निष्चय सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिये 35 प्रतिषत आरक्षण का था। इस निष्चय पर हमने अमल कर दिया है और यह जनवरी 2016 से ही लागू कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के बाद अब बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी कुरीति पर बड़े चोट करने की जरूरत है। बाल विवाह जो अभी 39 प्रतिषत है, इसके साथ ही जागरूकता के बावजूद भी बड़ी संख्या में महिलायें दहेज प्रथा की षिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह जिसकी संख्या अभी 6 लाख 80 हजार है, उसे 10 लाख करने का लक्ष्य है।

ये स्वयं सहायता समूह दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ व्यापक जन चेतना जगाने का दायित्व निभायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग गरीबी के कारण, शिक्षा की कमी के कारण, रीति रिवाज के कारण बाल विवाह करते हैं, इसका दुष्परिणाम काफी गंभीर होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहाॅ कानून है कि 21 साल से कम उम्र के लड़के और 18 साल के कम उम्र की लड़की की शादी नहीं हो सकती परंतु बाल विवाह होता है।

बाल विवाह के पष्चात लड़कियों को काफी कष्ट झेलना पड़ता है। अगर लड़की कम उम्र में गर्भ धारण करती है तो प्रसव के दौरान बच्चा एवं माॅ की मौत की आषंकायें बढ़ जाती है और अगर बच्चे होते हैं तो उन्हें अनेक प्रकार की बीमारी सताती है। आज कल बौनापन के शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही है। बौनेपन का एक प्रमुख कारण बाल विवाह है। आॅकड़े के विष्लेषण से यह पता चलता है कि वैसे देष जहाॅ लोगों की लंबाई कम थी, उनकी लंबाई बढ़ रही है परंतु हमारे यहाॅ लोग बौनेपन के षिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह का एक और कारण यह भी है कि लोगों को लगता है कि ज्यादा उम्र में लड़की की शादी करने में दहेज ज्यादा देना होगा।

देश भर में महिला उत्पीड़न में हमारा स्थान 26वां है, वहीं दहेज उत्पीड़न के मामले में उतर प्रदेष के बाद दूसरा है। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा पर नियंत्रण के बाद महिला संबंधी अपराध में कमी आयेगी। 2016 में दहेज मृत्यु के 987 मामले और दहेज प्रताड़ना 4852 मामले सामने आये हैं। अगर बाल विवाह एवं दहेज प्रथा से छुटकारा मिल जाय तो कितना अच्छा होगा।

दहेज के खिलाफ पहले से 1961 का कानून है तथा 2006 का बाल विवाह का कानून है। इसके बावजूद ये स्थिति है। हमने संकल्प लिया है कि दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ सषक्त अभियान चलायेंगे और इसकी बुनियाद को आगे ले जायेंगे। बिहार को बाल विवाह एवं दहेज प्रथा से मुक्त बनायेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास गौरवषाली रहा है। उन्होंने कहा कि सम्राट अषोक कन्वेंषन सेंटर जहाॅ हम बैठे हुये हैं, हमारे महान सम्राट अषोक यहीं के थे।

मौर्य, गुप्त वंष का इतिहास यहीं का रहा है। इसी पाटलिपुत्र की धरती से आज जो भारत भूखण्ड है, उससे बड़े भूखण्ड पर यहाॅ से शासन का संचालन होता था। षिक्षा के क्षेत्र में दुनिया का सबसे पहला विष्वविद्यालय यहीं था।

नालंदा, बिक्रमषीला विष्वविद्यालय रहे हैं अब तो तेलहाड़ा में भी विष्वविद्यालय का पता चला है। इसी धरती से चाणक्य ने अर्थषास्त्र की रचना की है, आर्यभट्ट ने दुनिया को शून्य दिया। ये ज्ञान की भूमि है, राज संचालन की भूमि है। यह गुरू गोविंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली है।

बुद्ध की ज्ञान की भूमि है। चम्पारण में गाॅधी जी जो कि राजकुमार शुक्ल के द्वारा निलहा किसान समाधान के लिये बुलाये गये थे, ने यहाॅ आकर चम्पारण सत्याग्रह की शुरूआत की। यह आन्दोलन सफल रहा, सरकार को झुकना पड़ा, बिहार अग्रेरियन बिल लाया गया, टैक्स को रोकना पड़ा। चम्पारण सत्याग्रह ने देष की आजादी की लड़ाई को एक नई दिषा दी। उसके 30 साल के भीतर ही देष आजाद हुआ।

हमारे लोक संवाद के कार्यक्रम में एक महिला ने आकर कहा कि शराबबंदी की तरह ही दहेज प्रथा के खिलाफ भी अभियान चलाइये उसी समय से इसके खिलाफ अभियान चलाने का मेरे मन में संकल्प आया। बाल विवाह, दहेज प्रथा के खिलाफ संकल्प में आप भी शामिल होइये। दहेज वाली शादी में न जाने का सबसे आग्रह करता हूॅ।

शराबबंदी से मिला जन समर्थन हमारे प्रयास को बुलंद करेगा। इसमें जीविका की दीदी भागीदार बनें, बाल विवाह, दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करें। साथ ही शराबबंदी एवं नषामुक्ति को एक क्षण भी न भूलें। हमें पूरा विष्वास है कि जनता का पूरा सहयोग मिलेगा। लोगों के भरोसे से समाज बदलेगा।

पिछली बार शराबबंदी के पहले भी अभियान चलाया था और शराबबंदी के बाद भी अभियान चलाया गया। जो मानव श्रृंखला 21 जनवरी 2017 को शराबबंदी एवं नषामुक्ति के लिये बनी थी, वैसी ही मानव श्रृंखला फिर 21 जनवरी 2018 को दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ बनायी जाय जो जन भावना का प्रकटीकरण होगा। उन्होंने लोगों को इस अभियान को दिल से अपनाने का आह्वान किया।

बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी कुरीति को दूर करने के लिये अपने मन को समझाइये और अपने पड़ोस को भी। सात निष्चय चलेगा, यह संकल्प है। सभी से प्रार्थना है कि आज के दिन संकल्प लें, एकजुट हों और नई ऊॅचाई पर बिहार को ले जायें। सभी समूह, संगठन, जीविका दीदी सबलोग मिलकर इसको गति दें। आप बीती घटना बताने वाली तीनों बच्चियों का मैं अभिनंदन करता हूॅ जो एक मिसाल बनी है। इस अभियान को राजनीति से न जोड़ें। 21 जनवरी 2018 को सभी पार्टी के लोग मानव श्रृंखला में शामिल हों।

आयोजित कार्यक्रम में वैषाली की रिंकी कुमारी जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठायी थी ने अपना अनुभव बताया, गया की काजल कुमारी जिन्होंने भी बाल विवाह का विरोध किया था उन्होंने ने भी अपना अनुभव बताया तथा पटना की धनमंती कुमारी जिन्होंने दहेज प्रथा का विरोध किया था ने भी अपना अनुभव बताया। आयोजित कार्यक्रम को अध्यक्ष बिहार विधानसभा श्री विजय कुमार चैधरी, उप मुख्यमंत्री श्री सुषील कुमार मोदी, समाज कल्याण मंत्री श्रीमती कुमारी मंजू वर्मा, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, यूनिसेफ के प्रतिनिधि डाॅ0 यासमिन अली हक ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर सभापति बिहार विधान परिषद श्री हारून रसीद, भवन निर्माण मंत्री श्री महेष्वर हजारी, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, नगर विकास एवं आवास मंत्री श्री सुरेष शर्मा, षिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, पंचायती राज मंत्री श्री कपिलदेव कामत, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, गणमान्य व्यक्ति, विकास आयुक्त श्री षिषिर सिन्हा, पुलिस महानिदेषक श्री पी0के0 ठाकुर, विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीष चन्द्रा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी, जन षिक्षा कार्यकर्ता, जीविका की दीदी, विकास मित्र सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

टिप्पणी–दहेज प्रथा समाज की कोढ. सरकार से ज्यादा समाज के मानवीय प्राणी को सख्त होने की आवश्यकता .—शैलेश कुमार , वेब संपादक