— तो सच बताओ–शैलेश कुमार

1990 हिंदी दैनिक आज (पटना, बिहार) में वरिष्ठ समीक्षक कुलदीप नैयर का एक वाक्य जो आज भी समीचीन है —कांग्रेस –की चुनावी नीति –दाढ़ी और साडी है।

आयें ! इतने बड़े समीक्षक ने दो शब्दों में ही कांग्रेस की राजनीति को समेट दिया, क्यों ?

दाढ़ी -अर्थात मुस्लिम समाजिक और राजनीतिक चेतना शून्य प्राणी और साडी जमाते चौखठों की देवी। दाढ़ी जब परिपक्व होने लगा तो साड़ियों की ओर लपका और जब साड़ियों में बुद्धिवर्धक चूर्ण का प्रभाव दिखने लगा तो हिन्दू आतंकवादी जैसे दुर्भाग्यपूर्ण चक्रब्यूह कि रचना की।

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अर्थात कांग्रेस ने कभी भी हिंदू या राष्ट्रीय एकता की बातें नही की,जब भी उसने कदम उठाया समाजिक बंधुत्व पर प्रहार किया। समाज को तोड्ने वाला सबसे घातक अस्त्र –धर्मनिरपेक्ष —- शब्द को संविधान में जोडकर हिंदुओं और मुस्लिमों को विभाजित किया इतना ही नही उसने सिखों को भी भारत विरोधी दारु पीलाकर सड्क पर हिंदुओं की हत्या करने के लिये छोड दिया।

सिखों में जन्म भूमि की खून रग-रग में व्याप्त है जिसके कारण हिंदुओं और सिखों के बीच दरार पैदा करने में सफल नही हो सका।

डा० सनयात सेन —- ” अधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता नही होनी चाहिये लेकिन राष्ट्र को पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिये।” कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की स्वतंत्रता का अतिक्रमण कर गिरोहवाद का श्री – गणेश किया।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का ही परिणाम जम्मू -कश्मीर और मुस्लिम तलाकवाद।

ये दोनों कालजयी महामंद बुद्धि के महामूर्ख है।

अगर दाढ़ी ने सुन लिया की अल्लाह खतरे में है तो फिर प्राणों की बाजी लगा देंगे। जबकि उनहें यह बुद्धि नही है की इंसान और जीव को पैदा करने वालों पर कभी संकट नही मंडराता है। वह किसी भी प्रकार के बंधन से मुक्त है।

प्रतिधारा में हिंदुओं ने भी भगवान के नाम पर आवास योजना शुरु किया। इस आवास योजना का परिणाम ही तथा कथित राम -मंदिर निर्माण योजना है।

हिंदु और मुस्लिम दोनों महामंद बुद्धि के प्राणी हैं।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राज किया जिसमें समाजिक समस्याऐं गौण हो गया।

चमचमाते हुए साडी को अगर ये कह दिया जाय की कोना टेढ़ा है तो दिनभर
अपने पति का कान खाती रहेगी।

इस हालात में कांग्रेस ने 65 वर्षों तक शासन किया। इसमें ब्राह्मणों की योगदान को नकारा नही जा सकता है। जिस तरह भगवान् के लिए घर बनाने हेतु भिक्षाटन करते थे या हैं, उसी तरह उन्होंने समाज को एकत्रित करने का प्रयास नहीं किया। सत्ता से चिपके रहे और समाजिक बंधुत्व को तोडने का षडयंत्र रचते रहे।

कांग्रेस ने दलितों को आरक्षण , खैरात जैसे शब्दों से नवाजा और भिखारियों की तरह टुकड़े फेंकते रहे। कभी भी स्वावलम्बन बनाने की कोई नीति नहीं बनाई और न ही इन वर्गों को राष्ट्र के मुख्य धारा में सहभागिता के लिए जिम्मेदारी सौंपी।

इस दरम्यान कांग्रेस के लिये दो ही वर्ग महत्वपूर्ण रहे —एक मुस्लिम और दूसरा —- ब्राह्मण। इन दोनों वर्गों की जनसंख्या यत्र -तत्र सर्वत्र है।

राजनीतिक गाडी का चक्का बदला। साडी, दाढ़ी के साथ लाठी का पदार्पण हुआ। लोगो में राष्ट्रीयता और अपनेपन का एहसास हुआ। खुल्ल्म- खुल्ला जातीयता का परचम फहराया। अपने- अपने जातियों के प्रति प्रेम भाव बढा। फलत: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश और बिहार में परिवर्तनकारी सरकारें बनी।

औटोवन विस्मार्क — ” मुख्य बातें है इतिहास बनाना न की लिखना।”

उपेक्षित लोगों में सुधार की आशाएं दिखने लगी। इन लोगों ने जमकर 15 -15 वर्षों तक अपने बैकवर्ड आकांओं पर निर्भर किया लेकिन निराशा ही हाथ लगी श्री लालूप्रसाद यादव, श्री मुलायम सिंह यादव और मायावती ने जमकर प्रदेशवासियों को उल्लू बनाया। यह काल भैंसालोटन का काल सिद्ध हुआ. जिस कुंऐं के विरुद्ध इन्हें सता सौंपा गया ये लोग उसी कुंऐं में गोता लगाने लगे.फलतः जनता में घोर आशाहीनता व्याप्त हो गया।

एक नया इतिहास बनाने की आशा धुमिल हो गया।

हर क्षेत्र में हिंदुओं को हतोत्साहित किया जाने लगा और गलतियों को सही ठहराने वाले गिरोह तैयार किया गया, जिसमें लेखक, दृष्ट मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है।

जनता को राजनीतिक दलों ने जमकर लूटा। इस लूटवाद राजनीति से देशवासी निराश और हतोत्साहित हो गये । राजनीतिक दलों के विरुद्ध घोर घृणा पैदा हो गया। इससे निजात पाने के लिए जनता ने खुद विकल्प ढूंढ लिया है ,कहावत सही है –प्यासे कुंए ढूंढ लेता है और पानी बहाव।

सबसे बड़ा परिवर्तन किया है महिलाओं ने। उन्हें राजनीतिक चेतना के साथ ही घर चलाने का विकल्प भी मिला। जिसमें आजीविका,स्वयसेवी संस्था की अहम भूमिका है। इन संस्थाओं ने निराश और गरीब महिलाओं के बीच संजीवनी बूंटी का काम किया है और कर रहा है। कुंठित महिलाओं में आत्मविश्वास जगाया, उसे अपने आप से पहचान कराया।

सरकार भी दिल खोलकर महिला और स्कूली बालाओं की सहायता के लिए आगे आई, महिलाओं के महत्व को समझ कर सुरक्षा के लिए दृढ़वत हुई।

समाज में सबसे बड़ा परिवर्तन स्कूली बालाओं में साईकिल वितरण से हुआ है । साइकिल ने सोच ही बदल दिया है। सरकार के प्रति साइकिल पाठक बेटियों ने अहम भूमिका निभाई है।

देश में दो ही व्यक्ति हैं जो अपने विचार रखने में मुँहफट है —एक बेटी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ । यही कारण है की अगर कहीं महिलाओं के साथ वीभत्स व्यवहार होता है तो चारो तरफ से जनक्रांति की लहर सड़कों पर दौड़ जाती है।

एक राष्ट्र की सोच में परिवर्तन लाता है दूसरा समाज की सोच में।

स्वभाविक है, अगर समाज के सोच में परिवर्तन होगा तो राष्ट्र के सोच में परिवर्तन स्वभाविक है।

कांग्रेस काल में मीडिया को संकुचित स्वतन्त्रता मिली थी। दृष्टपटल पर सिर्फ मीडिया स्वतंत्र था।

65 वर्ष की राजनीतिक काल और 3 वर्ष के राजनीतिक काल में सिर्फ यही परिवर्तन हुआ है। इस परिवर्तन से आर्थिक परिवर्तन में भारी बदलाव हुआ है।लेकिन जनता इसे स्वीकार नहीं कर रही है क्योंकि उसे चट -मंगनी और पट विवाह जैसे परिणाम चाहिए।

राजनीतिक जागरुकता का ही परिणाम है की आज गुजरात चुनाव में केंद्र और राज्य में सत्तारुढ दल पानी -पानी हो गया है और 300-300 वोटों के अंतराल से जीत दर्ज की है।

चुनाव किसी भी राज्य की हो – कांग्रेस पार्टी पूर्व की ओर लौटो की नीति पर चल रही है।

मुस्लिम, दलित और वर्गवाद। यह कांग्रेस की धरोहर है।

कांग्रेस की चुनावी नीति में राष्ट्र और राष्ट्रीय समस्या गौण रहती है, जिसे गुजरात, हिमाचलप्रदेश और उत्तरप्रदेश की चुनाव में मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। यह राष्ट्र और समाज निर्माण के लिये शुभ संकेत है।

डा० सनयात सेन ने सही कहा है –” समझना बहुत ही कठिन है,अगर एक बार समझ आ गई तो फिर क्रियांवित करना आसान है।”

यहां जनता और राजनीतिक दल एक दूसरे को आज तक समझने की कोशिश नही की है जिसके कारण जनता बार -बार ठगपन का शिकार हो रही है

आज कांग्रेस द्वारा मानमर्दित भारत जैसे राष्ट्र का सर गौरवांवित हुआ है तो इसका पूर्ण श्रेय राजनीतिक और समाजिक रुप से जागृत जनताओं को दी जाती है कि उन्होने बीजेपी राष्ट्रवादीयों के हाथों भारत को सूपुर्द किया है।

यहां बीजेपी को समाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय दायित्व को इमानदारी से निभाना है

इस संबंध में औटोवन विस्मार्क के शब्दों का उल्लेख करना न्यायसंगत है — ” जब आप दुनिया को बेवकूफ बनाना चाहते हैं, तो सच बताओ ”