जेल में हमारा कानून चलता है :——- जेलर कमलेश शर्मा

आज़मगढ़—- जन कल्याण, चिकित्सा, शिक्षा और कानूनी सहायता के लिए काम करने वाले संगठन (अवमेला) ने जयपुर सेंट्रल जेल में आतंकवाद के नाम पर कैद विचाराधीन कैदियों की जेल प्रशासन द्वारा बर्बर पिटाई पर गहरा आक्रोश और चिंता जताई है।

अवमेला अध्यक्ष डा० जावेद अख्तर ने कहा कि विगत एक महीने से भी अधिक समय से जेल प्रशासन इन कैदियों को 23-23 घंटे तक सेल के अंदर बंद रखकर मानसिक यातना और मौखिक धमकियों दे रहा था। किसी अनहोनी की आशंका से इन युवकों ने जेल प्रशासन के रवैये के खिलाफ धमाका केस के विशेष जज से शिकायत की थी और और जेल में विज़िटिंग जज को भेजने और शिकायत पेटिका लगाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे।

उन्होंने बताया कि जज महोदय से 29 मार्च को पहली बार शिकायत करने के बाद जेल वापसी पर जेलर कमलेश शर्मा ने लड़कों को धमकी देते हुए कहा था कि जेल में हमारा कानून चलता है और तुम लोगों का ऐसा हश्र करेंगे कि अदालत तक नहीं पहुंच पाओगे। अगर ज़बान खोली तो अंजाम तुम लोग अच्छी तरह जानते हो।

जबकि रात्रि ड्यूटी पर संतरी रमेशचंद्र मीणा ने सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि हमारी जेल में अगर 2-3 लाशें गिर जाती हैं तो हमें केवल 2-3 कागज़ काले करने पड़ते हैं। जब 30 मार्च को लड़कों ने जज से दोबारा शिकायत की तो जेल वापसी पर उन्हें बुरी तरह पीटा गया जिससे लड़कों को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गहलोत सरकार के आने के बाद से जयपुर सेंट्रल जेल के अंदर लड़कों पर ज़ुल्म बढ़ा है और विगत में भी कांग्रेस सरकारों में इस तरह के हमले होते रहे हैं। कांग्रेस की कथनी और करनी में कोई मेल नहीं है।

जयपुर जेल के बंद सरवर के चचा अबू आसिम ने कहा कि वह 31 मार्च को अपने भतीजे से मुलाकात के लिए जयपुर गए थे लेकिन जेल प्रशासन ने मुलाकात की अनुमति नहीं दी। मुकदमा जल्द समाप्त करने के लिए प्रतिदिन सुनवाई होती है और लड़कों को वहां हाज़िर रखा जाता है लेकिन जेल प्रशासन बिना कोई कारण बताए उन्हें अदालत में पेश नहीं कर रहा है।

उन्होंने बताया कि लड़कों के वकील पेकर फारूक़ और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों के एक दल ने कल जेल में घायल लड़कों से मुलाकात की। फोन पर होने वाली बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि आज़मगढ़ के सलमान, मो० सैफ, सैफुर्रहमान, मो० सरवर के अलावा भदोही निवसी शहबाज़ को काफी गंभीर चोटें आई हैं। मुलाकात के लिए शहबाज़ को व्हील चेअर पर लाया गया था।

सलमान के हाथ में फ्रैक्टचर की आशंका है और सिर व चेहरे पर चोट के कारण वह बोल नहीं पा रहा था जबकि सैफ के पैर और पीठ में गंभीर चोटें हैं और फैक्चर की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन सब का सबसे क्रूरतम पहलू यह है कि बच्चों को दवा के नाम पर पिछले चार दिनों तक एक टिकिया भी नहीं दी गई थी। इससे लगता है कि जेल प्रशासन बच्चों के जीवन से खिलावाड़ करने पर आमादा है जिसमें विकलांग बना देना या मार डालना भी शामिल हो सकता है।

मो० सैफ के पिता शादाब अहमद उर्फ मिस्टर ने कहा कि जेल प्रशासन की तरफ से कोई अधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है लेकिन ऐसी खबरें हैं जेल प्रशासन ने जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए अंधाधुंध लाठियां बरसाई हैं और लड़कों के ऊपर जेल अमले पर हमला करने का गलत आरोप लगाकर उल्टा हमारे ही लड़कों पर मुकदमा भी कायम किया है।

उन्होंने कहा कि वह और अन्य अभिभावक जल्द ही जयपुर जाएंगे और इस बर्बरता के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही करेंगे। उन्होंने इस घटना को विभिन्न एजेंसियों की साज़िश बताते हुए कि वहां मुकदमा अंतिम चरणों में है और इस तरह की हरकातों से वह अदालत को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

मसीहुद्दीन संजरी मो० 8090696449