ग्रामीण कवि सम्मेलन— बात तो तब है जब मर जाए औरों के लिए…

फिरोजाबाद (विकासपालिवाल)————-शब्दम् संस्था एवं सर्वोदय स्थली, जलालपुर द्वारा आयोजित ग्यारहवें ग्रामीण कवि सम्मेलन में सम सामयिक रचनाओं की हवा चली। 1

कार्यक्रम का प्रारम्भ मां सरस्वती के पूजन एवं वंदना के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। संस्था अध्यक्ष किरण बजाज द्वारा भेजे गए संदेश में कहा गया कि माध्यम से भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए कार्य किया जा रहा है।

कवि सम्मेलन में कवि अजय ‘अटल’ ने गीत प्रस्तुत करते हुए कहा- ‘हलधर गंगा की धवल धार, संस्कृति संरक्षक धर्म द्वार भारत के जनमन में बसते तुम बनकर पावन विचार।

राजीव ‘राज’ ने अपने काव्यपाठ की प्रस्तुति में कहा- बेटियाॅ ही घर बनाती हैं, दरो दीवार को…….ने लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। अरविन्द तिवारी ने अपने हास्य व्यंग्य से सभी उपस्थित लोगों को खूब हंसाया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने ग्रामीणों के बीच कविता के संस्कार पैदा करने के लिए शब्दम् द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने अपने काव्यपाठ में कहा- चार दिन की जिन्दगी, जिये तो क्या जिये। बात तो तब है जब मर जाए औरों के लिए…………।

कार्यक्रम में पर्यावरण मित्र द्वारा जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी को भी लगाया गया एवं निजामपूर गढूमा में तम्बाकू छोड़ चुके 15 लोगों को हरित कलश के देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम संचालन डाॅ. धु्रवेन्द्र भदौरिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. रजनी यादव ने दिया।

कार्यक्रम में उमाशंकर शर्मा, राधेश्याम यादव, मंजर उल-वासै, हिन्दलैम्प महाप्रबन्धक अनिल जैन, डाॅ. आर.क.े सिंह, केहरी सिंह, आरएन यादव, आरसी गुप्ता, डाॅ. डीपी सिंह, लक्ष्मीनारायण यादव, दीपक औहरी, मोहित सिंह आदि उपस्थित रहे।