गुजरात चुनाव -पटेल पर दांव पेंच–शैलेश कुमार

वर्तमान में गुजरात सरकार के पास 49 % (ओबीसी और अनुसूचित जाति और जनजाति) सीट आरक्षित है अब सरकार सिर्फ 1 % ही आरक्षित कर सकती है।
map of Gujarat vidhan sabha seat

****(नक्शा में रंगीन क्षेत्र आरक्षित है)****

गुजरात में कांग्रेस को अल्टीमेटम :

3 नवंबर तक कांग्रेस बताए कि पाटीदारों को आरक्षण कैसे देंगे ?

—हार्दिक पटेल

हार्दिक ने धमकी देते हुए कहा,‘अगर कांग्रेस अपना स्टैंड क्लियर नहीं करती तो राहुल गांधी के साथ भी सूरत में वही होगा जो अमित शाह के साथ हुआ था.
assembly of gujrat

गुजरात में पटेलों की आबादी करीब 15% है.

राज्य की करीब 80 सीटों पर पटेल समुदाय का प्रभाव है.

पटेल बीजेपी के मुख्य वोट बैंक माने जाते रहे हैं. बीजेपी के 182 में से 44 विधायक पटेल जाति से आते हैं,

***************वोट के ओल-बोल ******************

जूनागढ़ में राहुल गांधी ने कहा गुजरात में विकास पागल हो गया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने उत्तर देते हुए कहा कि राहुल गांधी चमगादड़ों के नेता जैसे हैं उन्हें गुजरात का विकास दिखाई नहीं दे रहा है.

रूपाणी ने कहा कि कांग्रेस पागल हो गई है.

कांग्रेस नेता अहमद पटेल के अस्पताल में आईएस आतंकियों के नौकरी का सवाल –संदिग्ध

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अभी तक हम कहा करते थे कि ‘कांग्रेस का हाथ, भ्रष्टाचार के साथ’ लेकिन अब लोग कहेंगे कि ‘कांग्रेस का हाथ, आतंकवाद के साथ’.

नकवी ने कहा कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल उस अस्पताल से जुड़े थे, जिसमें आतंकी नौकरी करते थे.

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने पुष्टि किया है कि गिरफ्तार आईएस खूंखार आतंकी मोहम्मद कासिम कांग्रेस नेता अहमद पटेल के संरक्षण वाले अस्पताल में नौकरी करता था.

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2012 के आम सभा चुनाव में कुल मतदान 71.32% हुआ जो 1980 के चुनाव से बहुत ही अधिक था. जिसमें बीजेपी को 116 सीटें और विपक्षी कांग्रेसियों को कुल 60 सीटों पर बढत मिली थी.

हार्दिक पटेल शिकार होने जा रहे है उन्हे पता होना चाहिये की साठ वर्षों तक सिर्फ वोट बैंक के लिये मुस्लिम को कांग्रेसियों ने रखैल बना कर रखा, मिला क्या ?? सभी जानते हैं,

हरियाणा कांग्रेसियों ने जाट आरक्षण का एक्का फेंका, मिला क्या ?? जाट नेता आज घर के न घाट के हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 50 % से अधिक आरक्षण नही हो सक्ता है ये हार्दिक पटेल खुद जानते है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल कि तरह चाल चलने की कोशिश करना न पटेल के हित में है और न ही हार्दिक पटेल को अपने हित में है.क्योंकि गुजरात के पटेल बिहार , उत्तरप्रदेश के यादव,अहिर और राजस्थान के गुज्जर जैसे बंद दिमाग के नही है. वे काफी जागरुक है.

किसी पार्टी के साथ हाथ मिलाने से बेहतर है कि हार्दिक पटेल को खुद चुनाव लड कर विधान सभा में धूम- धडाका मचाना चाहिये क्योंकि जहां वैधानिकता का सवाल है वहां सिर्फ वैधानिक रुप से लडाई ही न्याय संगत है.आरक्षण की लडाई सडक पर नही संविधान के साथ विधान सभा में होनी चाहिये क्योंकि मूल कारण संविधान है. मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री या कोई पार्टी नही है, वे चाह कर भी नही कर सकते है.

अगर हार्दिक पटेल बीस सीटें लेकर विधान सभा में खडे होते है तो पटेल वर्ग को एहसास होगा की हमारा प्रतिनिधित्व हो रहा है इससे सिर्फ गुजरात का ही राजनीतिक नक्शा नही बल्कि देश के सभी राज्यों का नक्शा बदल जायेगा.बडे जातियों के लिय एक उदाहरण प्रस्तुत होगा.

सही मायने में देश में समान्यवर्ग के गरीबों का कोई रखवाला नही है. वह असहाय और मजबूर है

उदाहरण—-बीजेपी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में जाट आरक्षण को हरियाणा विधानसभा में बहुमत से पारित किया गया लेकिन विपक्षियों ने मामला को कोर्ट में डाल कर जाट आरक्षण के रास्ते में अडंगा खडा कर दिया.