गरीबी रेखा से लेकर संसद तक का सफर – सोमेश्वर सिंह

सीधी – (विजय सिंह)-मौजूदा सांसद श्रीमती रीती पाठक ग्राम पंचायत पतुलखी के वार्ड क्रमांक 16 की निवासी है। जिनका नाम वर्ष 2007 तक के बीपीएल सूची सर्वे क्रमांक 351 में प्रविष्टि है। जिसके मुखिया उनके पति रजनीश पाठक है और परिवार सूची में 4 लोगों का नाम दर्ज है। जिसमें रजनीश पाठक सहित उनकी पत्नी रीती पाठक, पुत्री श्रुति और पुत्र संकल्प का नाम दर्ज है। शायद कम लोगों को मालूम होगा कि परिवार की माली हालत के मद्देनजर उन्होंने कभी ग्राम पंचायत पतुलखी से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए आवेदन पत्र दिया था, किन्तु उनका चयन नहीं हुआ था।

वर्ष 2007 तक मौजूदा सांसद श्रीमती रीती पाठक और उनका परिवार बीपीएल से सस्ता अनाज प्राप्त करता रहा। वक्त ने करवट बदली और वे जिला पंचायत की सदस्य बनी और अध्यक्ष चुनी गई। जिला पंचायत में अध्यक्ष बनने के साथ ही अपने लिये अपने भाई अरुण देव पाण्डेय के नाम से सफारी गाड़ी किराये में लगवा दी | जिसका पंजीयन उसके नाम था ही नहीं । उस गाड़ी में इतना डीजल उपयोग किया कि आपत्ति के बाद अंततः राशि लौटाने पड़ी। मामला लोकायुक्त तक पहुंचा था, जिसमें माननीय के बयान भी लिये गये थे।

वर्ष 2007 तक जो गरीबी रेखा के नीचे थीं और वे जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद डेढ़ करोड़ की मालकिन बन गई। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने यही विवरण दिया है । 2014 के बाद आगामी 5 वर्ष के कार्यकाल में उनके आमदनी में हुई बढ़ोत्तरी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे को भी पीछे छोड़ दिया। 2019 में सांसद महोदया के परिवार की चल-अचल संपत्ति 5 करोड़ हो चुकी है |

” इत्र, मित्र, चित्र और चरित्र ” किसी के परिचय के मोहताज नहीं होते हैं, श्रीमती रीति पाठक के 5 साल के संसदीय कार्य काल में सब उजागर हो गया | सम्पत्ति अर्जित करने में वह इतना मशगूल हो गईं कि उन्हें सार्वजनिक हित नजर ही नहीं आया। वे कोल इंडिया सलाहकार समिति की सदस्य थीं |

उन्होंने मंथली सहयोग के लिये एनसीएल सिंगरौली के प्रबंधन पर इतना दबाव बनाया कि एनसीएल के महाप्रबंधक कार्मिक व प्रशासन श्री किशोर पंड्या ने सीएमडी को पत्र लिखकर अपने सुरक्षा की गुहार लगाई और कहा कि भाजपा सांसद रीती पाठक तथा उनके परिवार के लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नाजायज दबाव बना रहे हैं और असमर्थता जाहिर करने पर सांसद महोदया उनका ट्रांसफर करा देने की धमकी दे रही हैं।

धन लिप्सा में श्रीमती रीति पाठक सारी मर्यादा भूल गई और उन्होंने अपने संसदीय कार्य काल में जमकर कमीशन बाजी की। यहां तक की चुरहट विधानसभा क्षेत्र के तिवरिगमा गांव के वरुणेन्द्र कुमार पांडे को विवेकानंद क्लब को क्रिकेट के लिए चेक द्वारा ₹15 हजार का चेक प्रदान किया। और पीछे से उनके सांसद प्रतिनिधि डॉ सिद्धार्थ मिश्रा, वापस लेने पहुँच गये, इतना दबाव बनाया गया कि वरुणेन्द्र को 15 हजार रूपये बैंक से आहरित कराकर नगद लौटाना पड़ा।

चुरहट विधान सभा क्षेत्र के मीडिया प्रभारी सोमेश्वर सिंह ने लिखित विज्ञप्ति में कहा है कि यह मेरा कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं है। जो कुछ भी मैं लिख रहा हूं, उसके सारे प्रामाणिक और तथ्यात्मक सबूत मेरे पास है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि कोल इंडिया सलाहकार समिति की सदस्य रहते हुए यदि श्रीमती रीति पाठक चाहती तो एनसीएल में विस्थापितों के पुनर्वास, उनके रोजगार और मुआवजा के लिए कुछ काम कर सकती थी। परंतु उन्होंने यह कुछ नहीं किया।

उन्होंने किसी गरीब बच्चे को गोद लिया होता तो 5 साल मे वह स्कूल जाने लगता। दुर्भाग्य देखिए की एक नवोदित बालक के बजाय उन्होंने पूरे गांव करवाही को गोद में ले लिया उस गांव की कहानी जग जाहिर है | न स्कूल है ना सड़क है, ना पीने का पानी है, न लोगों के सर पर छत है |