खादी नीति जल्द तैयार हो ताकि इस उद्योग में लगे लोगों की आमदनी बढ़ाई जा सके :- मुख्यमंत्री

पटना———- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने ज्ञान भवन स्थित सम्राट अशोक कन्वेंषन केन्द्र में राष्ट्रीय खादी/षिल्प महोत्सव 2018 का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया।
1
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बापू को नमन किया। ज्ञान भवन परिसर में कतिया चरखा, त्रिपुरारी मॉडल चरखा, मृणमय शिल्प धातु शिल्प, मधुबनी पेंटिंग, पाषाण शिल्प, काष्ठ कला एवं अन्य षिल्प कलाओं की लगी जीवंत प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया।

बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड पटना, उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान पटना,हबीबुल्लाह ग्रामीण विकास खादी ग्रामोद्योग मधुबनी, कस्तुरबा गाँधी आश्रम झारखंड,सादिक ग्रामीण विकास संस्थान, पूसा हनी समस्तीपुर, शिव खादी ग्रामोद्योग संघ मोतिहारी, दि नेशनल खादी कुल बिलिंग प्राइवेट लिमिटेड पानीपत हरियाणा, नालंदा जिला ग्रामोद्योग संघ नालंदा जैसी कई अन्य संस्थाओं द्वारा निर्मित खादी वस्त्रों एवं उत्पादित सामग्रियों की लगी प्रदर्शनी का भी मुख्यमंत्री ने बारीकियों से अवलोकन किया।

इस अवसर पर उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के उप निदेशक श्री अशोक कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ‘बिहार के हस्तशिल्प’ का मुख्यमंत्री ने लोकार्पण किया।

खादी-शिल्प महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और उद्योग विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेरे पिताजी स्वतंत्रता सेनानी थे, इस कारण बचपन से ही खादी के प्रति लगाव और मेरे मन में प्रेम का भाव रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र जीवन में खादी के प्रति आकर्षण और बढ़ गया और उसी समय से ही हम खादी का कुर्ता-पैजामा धारण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँधी जी ने खादी को काफी अहमियत दी। पहले देश में कपड़े का अभाव था और लोगों के लिए वस्त्रों की काफी कमी थी, जिसकी जरूरत न सिर्फ खादी के माध्यम से पूरा किया गया बल्कि लोगों की आमदनी बढ़ाने में भी यह काफी कारगर साबित हुआ।

उन्होंने कहा कि 100 साल पहले चम्पारण सत्याग्रह के समय गाँधी जी ने खादी को बढ़ावा देने के लिए काफी जोर दिया और इसको लेकर संस्थाएं भी बनाई गयीं, जिसके बाद खादी लोगों की भावना बन गयी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लोग खादी वस्त्र धारण करते हैं लेकिन धीरे-धीरे इसमें गिरावट आ रही है।

उन्होंने कहा कि 10वीं लोकसभा में जब मैं सांसद था, उस समय मैंने देखा कि सुझाव के तौर पर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता पर्ची के पीछे खादी धारण करने के लिए लिखा रहता था लेकिन एक सभा में मैंने देखा कि सबसे अगली पंक्ति में बैठे उसी कांग्रेस पार्टी के मंत्रियों में से किसी ने भी खादी वस्त्र धारण नहीं किया था। उन्होंने कहा कि खादी की अहमियत और उसकी महत्ता को हमें भूलना नहीं चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गाँधी विकेंद्रीकरण के सिद्धांत पर देश की तरक्की चाहते थे ताकि गाँव-गलियों का भी विकास हो सके लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अगर गाँधी जी के सिद्धांत को अपनाया गया होता तो देश की आज अलग तस्वीर होती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में जे0पी0 के बाद गाँधी जी के विचारों एवं बापू से जुड़ी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में त्रिपुरारी बाबू ही सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले समस्तीपुर में मैंने चरखे से सूत कातने वाले की एक दिन की मजदूरी के बारे में जानना चाहा तो पता चला कि 40 से 50 रूपये तक दिये जाते हैं।

हमने कहा कि इससे कैसे काम चलेगा। उसके बाद त्रिपुरारी मॉडल चरखा का विकास हुआ, जिससे लोगों को एक दिन में कम से कम 150 से 200 रूपये तक की आमदनी होने लगी।

राज्य सरकार ने त्रिपुरारी मॉडल चरखे को अपनाया और इस वर्ष 2000 लोगों के बीच चरखा वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित है,जिसमें से 1 हजार 37 लाभुकों के बीच आज वितरित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी के विकास के लिए हमलोग प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए जितनी पैसे की जरूरत होगी, राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। सरकारी अधिकारियों-कर्मियों के साथ ही आमलोगों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्ताह में खादी नीति जल्द तैयार एक या दो दिन खादी वस्त्रों को अवश्य धारण करें।

इससे न सिर्फ खादी का विकास होगा बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे साथ ही इस उद्योग में लगे लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि चरखा से सूत कातने के काम में लगे लोगों का मन और ध्यान दोनों केन्द्रित रहता है, जो मनुष्य के व्यक्तित्व और शरीर दोनों के लिए लाभकारी है।

उन्होंने कहा कि आज के युग और लोगों की पसंद को ध्यान में रखकर उद्योग विभाग ने खादी वस्त्रों का डिजाइन करने का काम निफ्ट को सांैपा है ताकि खादी लोगों की पसंद बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने खादी की ब्रांडिंग करने का सुझाव दिया था और वह काम अब हो रहा है।

उन्होंने कहा कि मधुबनी की खादी काफी मशहूर है, जिसे दिल्ली में भी लोग काफी पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थाओं की हमारे यहाँ कमी नहीं है सिर्फ उन्हें सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि खादी से जुड़ी संस्थाएं मजबूत हों और इस काम में लगे लोगों की आमदनी भी बढ़े। उद्योग विभाग को सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप जो भी स्कीम बना रहे हैं, उस सन्दर्भ में खादी से जुड़े जो जानकार लोग हैं, उनसे बातचीत करें ताकि वह मजबूत हो सके।

उन्होंने कहा कि यथाशीघ्र हमलोग खादी नीति भी बना रहे हैं, जिसमे खादी के विकास के लिए कई बातें शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी नीति में आधुनिक चरखा और आधुनिक लूम के लिए 90 प्रतिशत तक का अनुदान, खादी संस्थाओं को ब्याज में अनुदान, खादी संस्थाओं को उत्पादन लागत का 20 प्रतिशत अनुदान जैसे कई प्रावधान होंगे ताकि इस उद्योग में लगे लोगों को सहूलियतें मिल सके।

खादी नीति में खादी संस्थाओं को क्रय या लीज पर ली गयी भूमि पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी और निबंधन शुल्क की प्रतिपूर्ति, कत्तिनों के लिए सामान्य सेट की व्यवस्था, बुनकरों के लिए कॉमन वर्क सेट का निर्माण, शिल्क कुकुन एवं ऊन के कच्चे माल के लिए बैंक बनाने, बिहार खादी पोर्टल प्रबंधन सूचना तंत्र के विकास के साथ ही गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि के लिए उत्पादन एवं डिजाइन विकास केंद्र स्थापित करने जैसे अन्य कई प्रावधान निहित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी का जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उसके साथ गाँधी जी के विचार भी लोगों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि खादी संस्थाओं को व्यापारिक नहीं बल्कि सामाजिक संगठन मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज यहाँ जो प्रदर्शनी लगाई गयी है, वह काफी सुंदर है और हर वर्ष न सिर्फ इस तरह की प्रदर्शनी पटना में बल्कि बिहार के विभिन्न हिस्सों में भी प्रमंडलवार लगनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ज्ञान भवन का उद्घाटन पिछले वर्ष 10 अप्रैल को महात्मा गाँधी के चपारण सत्याग्रह के संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम से ही हुआ और हमारा प्रयास है कि बापू के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया जाए।

उन्होंने कहा कि बिहार में 8 लाख जीविका समूह हैं,उनके माध्यम से भी खादी को प्रचारित करने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक लोग खादी के प्रति आकृष्ट हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी नीति जल्द से जल्द तैयार हो ताकि इस उद्योग में लगे लोगों की आमदनी बढ़ाई जा सके।

खादी महोत्सव को गांधी संग्रहालय के सचिव सह गाँधीवादी विचारक श्री रजी अहमद, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री विनोद नारायण झा, प्रधान सचिव उद्योग डाॅ0 एस0 सिद्दार्थ ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर भवन निर्माण मंत्री श्री महेश्वर हजारी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष वर्मा, निदेशक हस्तकरघा श्री साकेत कुमार, बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड पटना के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बी0एन0 प्रसाद सहित उद्योग विभाग से जुड़े अधिकारी, कर्मी एवं खादी प्रेमी उपस्थित थे।
’’’’’’