कोई मिलता ही नहीं, ———–राधा श्रोत्रिय”आशा”,भोपाल

बच निकलने का इशारा कोई मिलता ही नहीं,
हमको दरिया का किनारा कोई मिलता ही नहीं
तोड़ देते हैं भरोसे को सभी पल भर में,
जोड़ने वाला दुबारा कोई मिलता ही नहीं
हम तो हो जाते हैं पल भर में सभी के लेकिन
एक मुद्दत से हमारा कोई मिलता ही नहीं
मिल तो जाते हैं बहुत लोग सर ए राह मगर,
हम जिसे कह दें हमारा, कोई मिलता ही नहीं
वक़्त की धारा में सब लोग बहे जाते हैं,
मोड़े जो वक़्त की धारा कोई मिलता ही नहीं
हैं जिन्हें सच में सहारों की जरूरत आशा,
उनको दुनिया में सहारा कोई मिलता ही नहीं