काका हाथरसी के अनमोल कृति

जन्म : उत्तरप्रदेश ः- हाथरस :  प्रभु लाल गर्ग :
18 सितम्बर 1906,  मृत्यु 18 सितम्बर 1995 
1
मन मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार,
ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार।
झूठों के घर पंडित बाचें, कथा सत्य भगवान की,
जय बोलो बेईमान की!
प्रजातंत्र के पेड़ पर, कौआ करें किलोल,
टेप-रिकार्डर में भरे, चमगादड़ के बोल।
नित्य नई योजना बन रहीं, जन-जन के कल्याण की,
जय बोलो बेईमान की!
महंगाई ने कर दिए, राशन-कारड फेल,
पंख लगाकर उड़ गए चीनी-मिट्टी-तेल।
‘क्यू’ में धक्का मार किवाड़े बंद हुईं दुकान की,
जय बोलो बेईमान की!
डाक-तार-संचार का ‘प्रगति’ कर रहा काम,
कछुआ की गति चल रहे, लैटर-टेलीग्राम।
धीरे काम करो, तब होगी उन्नति हिंदुस्तान की,
जय बोलो बेईमान की!
चैक कैश कर बैंक से, लाया ठेकेदार,
आज बनाया पुल नया, कल पड़ गई दरार।
बांकी झांकी कर लो काकी, फाइव ईयर प्लान की,
जय बोलो बेईमान की!
वेतन लेने को खड़े प्रोफेसर जगदीश,
छहसौ पर दस्तख्त किए, मिले चारसौ-बीस
मन-ही-मन कर रहे कल्पना शेष रकम के दान की,
जय बोलो बेईमान की!
खड़े ट्रेन में चल रहे, कक्का धक्का खायँ,
पांच रुपे की भेंट में, टूटायर मिल जायँ।
हर स्टेशन पर हो पूजा श्री टी. टी. भगवान की,
जय बोलो बेईमान की!
बेकारी औ भुखमरी, महंगाई घनघोर,
घिसे-पिटे ये शब्द हैं, बंद कीजिए शोर।
अभी जरूरत है जनता के त्याग और बलिदान की,
जय बोलो बेईमान की!
मिल-मालिक से मिल जाएँ नेता नमकहलाल,
मंत्र पढ़ दिया कान में, खत्म हुई हड़ताल।
पत्र-पुष्प से पाकिट भर दी, श्रमिकों के शैतान की,
जय बोलो बेईमान की!
न्याय और अन्याय का नोट करो डिफरेंस,
जिसकी लाठी बलवती, हांकले गया भैंस।
निर्बल धक्के खाएँ, तूती बोल रही बलवान की,
जय बोलो बेईमान की!
पर-उपकारी भावना पेशकार से सीख,
दस रुपए के नोट में बदल गई तारीख।
खाल खिंच रही न्यायालय में, सत्य-धर्म-ईमान की,
जय बोलो बेईमान की!
नेता जी की कार से, कुचल गया मजदूर,
बीच सड़क पर मर गया, हुई गरीबी दूर।
गाड़ी को ले गए भगाकर, जय हो कृपानिधान की!
जय बोलो बेईमान की!