कलमवीर सम्मानित–चोटी निरी लुगाईयां की -हरिंद्र यादव

बहादुरगढ़। क्षेत्र की प्रमुख साहित्यिक संस्था कलमवीर विचार मंच ने काव्य रसिकों के अनुरोध पर एक अनूठी पहल की है। संस्था द्वारा आयोजित किए जाने वाले नये कार्यक्रम ‘जी भरकर सुनिए’ के अंतर्गत हर माह प्रदेश के एक-एक लोकप्रिय पुरूष और महिला रचनाकार का काव्य पाठ जहां वरिष्ठ रचनाकारों को साहित्य के उज्जवल भविष्य के प्रति आश्वस्त करेगा,वहीं उदीयमान नवोदित रचनाकारों को भी इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।यह जानकारी संस्था के राष्ट्रीय संयोजक कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने दी है।
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उन्होंने बताया कि ‘जी भरकर सुनिए’ की पहली कड़ी में गुरूग्राम के दो कलमवीरों हरिंद्र यादव व श्रीमती सुशीला शिवराण ने श्रोताओं को अपनी बहुमुखी प्रतिभा से परिचित कराया।मंच की गुरूग्राम इकाई के संरक्षक अशोक शर्मा ‘अक्स’ व प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री मुकुल शर्मा ‘सुमन’ के सानिध्य और युवा कवि सुन्दर कटारिया के संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में सर्वश्री घमण्डी लाल अग्रवाल,श्याम स्नेही, वीणा अग्रवाल, लाडो कटारिया, सविता सयाल,ममता अमृत,रीता जयहिन्द हाथरसी सहित 2दिल्ली व हरियाणा के दर्जनों साहित्यकारों ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद से जुड़े हरियाणवी हास्य कवि हरिन्द्र यादव व संस्कार भारती की प्रतिनिधि चर्चित दोहाकार सुशीला शिवराण की रचनाओं को मनोयोगपूर्वक सुना व सराहा ।कार्यक्रम के अंत में दोनों कलमवीरों की अनुकरणीय साहित्य साधना का उल्लेख करते हुए उन्हें सुंदर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कटण लागरी चोटी निरी लुगाईयां की
-हरिंद्र यादव

बाल़ कटे दादी चाच्ची के, खैर रही ना ताईयां की,
दिन धोल़े सैं कटण लागरी, चोटी निरि लुगाईयां की।

शैम्पु ला ला धोया करती घणे जतन तै पाल़े थे,
किसे के भूरे किसे के धोल़े किसे के काल़े काल़े थे।

बिन पैसे के कटण लागरे नही जरूरत नाईयां की।
दिन धोल़े सैं कटण लागरी, चोटी निरी लुगाईयां की।

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शीश झुका वंदन करो,ये पूजा के धाम
-सुशीला शिवराण

ख़ून-पसीना एक कर, ऊँची दी तालीम।
बच्चे अफ़सर हो गए, अब्बा हुए यतीम।।

मातम में हैं चूड़ियाँ, बिलखे है सिंदूर।
विधवा कहे शहीद की, जीता रह ओ शूर।।

बलिदानों की वेदियाँ, शहादतों के ग्राम।
शीश झुका वंदन करो, ये पूजा के धाम।।