बिहार सरकार ख्याली पुलाव

वर्तमान में नीतीश सरकार से बिहार के 70% जनता आक्रोशित।

मुख्य कारक — योजनाओं के लागू करने की प्रशासनिक प्रबंधहीनता —

जनता के विरुद्ध सरकार के प्रति वफादार अफसर ——–

सुधार नहीं हुआ तो जनतादल यूनाइटेड का लुटिया डूबना तय ——-

पूर्णिया,सहरसा और खगडिया में पप्पू यादव समीकरण बिगाड नेता —–


चूंकि राजद शुरु से ही छद्म्य कांग्रेसी है और मुस्लिम कांग्रेस का कट्टर समर्थक है या वह उसे वोट करता है जो हिंदू विरोधी हो, अगर जनता ने मूर्खता दिखाई तो बिहार का समीकरण स्पष्ट है कि राजद कि खाते में जा रहा है क्योंकि बिहार में ट्रैन चलाकर युवाओं को बाहर भगाने कि साजिश मे लालू यादव पंद्रह वर्षों तक कायम रहा बिहार मे रेल विकास करने के बदले लालू प्रसाद यादव ने रेल चलाओं और युवा भगाओं अभियान चलाने में सफल रहे.

देखा जाय तो कमोवेश ,वर्तमान कि सरकार ने भी युवा भगाओं की नीति पर चल कर गुंडा बसाओं कि नीति की समीक्षा कर रहे हैं.

गुंडागिरि में राज्य पंद्रह वर्ष पीछे चला गया है , प्रखंड स्तर से लेकर समाहरणालय तक की स्थिति मूंगफली बेचने के केंद्र जैसे बन गया है.

बिहार सरकार को महिलाऐं नही संभल रही है, सुग्रीव दरबार जैसा लग रहा है ,कही आशाओं कि आशा पर पानी फिर रहा है तो कही आंगनबांडी -बाल्टी और झंडी लेकर समाहरणालय में छाती पीट रही है.

एक आवासीय प्रमाण पत्र को लेकर 20-25 किलोमीटर का दौड लगाना पड रहा है वह भी एक दिन नही कई दिन में एक प्रमाण पत्र मिलता है.

जमीन जायदाद संबंधी वेब साईट जंक बन कर रह गया है.

बिहार डिजिटल का अनुपम उदाहरण——

किसी भी कामन सर्विस सेंटर से जमीन संबंधी आवेदन करें , फिर इस आवेदन का प्रिंट लेकर 20-25 किलोमीटर दूर आफिस जाऐं उसे दें फिर वहां पाकेट साफ करायें और पेपर लेकर घर आयें. ये है बिहार डिजीटल अर्थात आईटी बिहार.

किसी भी जिला में जिला समाहरणालय में समाहर्ता के आईटी सेवा जनता के समस्या समाधान के लिये नही है अगर है भी तो, वह विभागीय या पट्ना सचिवालय के लिये है.

मुख्यमंत्री लोकसंवाद कार्यक्रम एक नमूना——-

अपने कुछ खास लोगों को प्रश्न देकर आयोजित कर मियां मिट्ठु बनना.

इस संवाद में कोई आप पीडीत व्यक्ति नही रह्ता है, जिसे विलाप करते हुए दिखाया जाता है, वह रंगा सियार होता है इसलिये लोक संवाद से कोई जनमत का तैयार नही हो रहा है.

सरकार के किसी भी जनहित कार्यालय की व्यवस्था पर नजर डालें तो वह घोडा घास ही दिखाई देता है.

पढे-लिखे युवाओं को पंचायत और कृषि मित्र के रुप में मनरेगा बनाने कि साजिश भी कोई समाधान नही है .

इसलिये सरकार को जनता घास दिखाने के लिये तैयार है. नीतिश सरकार कोई ख्याली पुलाव का सपना न देखें.