अमृत –जीआईएस आधारित विकास योजना तैयार

शिमला ———–अटल मिशन फॉर रैजुविनेशन एण्ड अर्बन ट्रांसफार्मेशन (अमृत) के अंतर्गत शिमला योजना क्षेत्र के लिए जीआईएस आधारित विकास योजना को तैयार करने के लिए आज यहां आरम्भिक बैठक एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

नगर एवं ग्राम नियोजन के निदेशक श्री राजेश्वर गोयल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने शिमला तथा कुल्लू शहरों को अमृत मिशन के अंतर्गत शामिल किया है जबकि धर्मशाला तथा शिमला को स्मार्ट सिटी मिशन तथा औट, हिन्नर तथा सांगला-कमरू को ग्रामीण मिशन के अंतर्गत लाया है।

उन्होंने कहा कि विभाग को शिमला के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान बनाने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। विभाग इस कार्य को सबसे कम बोलीदाता एवं निजी परामर्शी मैसर्ज मार्स प्लानिंग एण्ड इंजीनियरिंग सर्विसिज अहमदाबाद के माध्यम से पूरा करवाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए 11 अक्तूबर, 2017 को अवार्ड पत्र जारी किया गया है जबकि अनुबंध समझौता 04 जनवरी, 2018 को हस्ताक्षरित किया गया ।

श्री गोयल ने कहा कि हिमाचल देश के उन शीर्ष 6 राज्यों में शामिल है जिन्होंने नेशनल रिमोट सैंसिंग सैन्टर (एनआरएसई) हैदराबाद को अपनी डिमारकेशन रिपोर्ट सौंपी है। इस सैन्टर द्वारा शिमला शहर के लिए मूल खाका तैयार किया जा रहा है, जो एक माह की अवधि में पूरा किया जाएगा।

उन्होंने संबंधित विभागों को जमीन के नीचे से बिजली की तारें, पानी व मल निकासी लाईनों आदि के लिए ‘डक्ट’ बनाने पर अपने सुझाव एक माह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा, क्योंकि शिमला के लिए जीआईएस आधारित विकास योजना के निर्माण के लिए 15 माह की समयसीमा दी गई है।

उन्होंने इस कार्य में तेजी लाने तथा सुविधा के लिए सभी सम्बद्ध विभागों में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिमला शहर का चयन अमृत तथा स्मार्ट सिटी मिशन में किया गया है इसलिए इन दोनों कार्यो को एक दूसरे के साथ जोड़ने की आवश्यकता है।

राज्य नगर नियोजक इंजीनियर संदीप शर्मा ने कहा कि शिमला तथा कुल्लू शहर अमृत योजना के तहत चयनित किए गए 500 शहरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस मिशन के तहत नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए अधोसंरचना का विकास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अधोसंरचना लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने तथा सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मददगार सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति, सीवरेज सुविधाओं तथा उनके प्रबन्धन, नालियों, पैदल रास्तों, गैर-मौटर एवं जन परिवहन सुविधाओं और पार्किंग स्थलों के निर्माण पर विशेष बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे शहरों में हरित स्थलों, पार्क, बच्चों के लिए मनोरंजन केन्द्र विकसित एवं स्तरोन्नत करने से सुविधाआें की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

शिमला नगर नियोजक श्रीमती अंजलि शर्मा ने कहा कि शिमला योजना क्षेत्र का गठन नवम्बर,1977 में किया गया था तथा अन्तरिम विकास योजना को 1979 में अधिसूचित किया गया था । उन्होंने कहा शिमला विकास प्राधिकरण का गठन अन्तरिम विकास योजना के कार्यान्वयन के लिए 1983 में किया गया तथा अभी तक इस योजना में लगभग 34 संशोधन किए गए हैं ।

उन्होंने कहा कि अमृत मिशन के तहत शिमला योजना क्षेत्र में नगर निगम शिमला के अतिरिक्त कुफरी विशेष क्षेत्र, शोघी विशेष क्षेत्र, घनाहट्टी विशेष क्षेत्र तथा अतिरिक्त योजना क्षेत्र का कुल 22450 हैक्टैयर क्षेत्र आता है जिसमें 2011 की जनगणना आंकड़ों के अनुसार 2,32,900 की आबादी है।

मै. मार्स कम्पनी प्राईवेट लिमिटेड के परियोजना निदेशक ने अमृत मिशन के तहत शिमला के लिए जीआईएस आधारित विकास योजना के निर्माण पर प्र्रस्तुति दी। उन्होंने सभी सम्बन्धित विभागां को तय सीमा के भीतर विकास योजना तैयार करने के लिए जानकारी प्रदान व सांझा करने का आग्रह किया।

बैठक में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।