अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला — बिहार दिवस

नई दिल्ली। 26 नवम्बर 2017————— आज भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2017, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में बिहार दिवस का आयोजन किया गया।
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उद्योग मंत्री, बिहार सरकार श्री जय कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन किया, बिहार मंडप के उद्घाटन के पश्चात माननीय मंत्री श्री सिंह ने हैंगर-2 स्थित सभी स्टाॅलों पर जाकर बिहार के सभी स्टार्ट-अप और कला-संस्कृति को देखा। इसके बाद उन्होंने हाॅल नं0-07 में सूचना एंव जन-सम्पर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

इस अवसर पर प्रधान सचिव, उद्योग विभाग श्री एस. सिद्वार्थ, स्थानिक आयुक्त, बिहार श्री विपिन कुमार, अपर स्थानिक आयुक्त श्री मनोज कुमार सिंह सहित अनेक पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

विदित हो कि आज ही संध्या में प्रगति मैदान में बिहार सरकार की तरफ से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जा रहा है।

<<<< मुख्य बिंदु>>>>

राज्य के लगभग 74 प्रतिशत लोग आजीविका के लिए कृषि-कार्य पर निर्भर है। कृषि के बाद उद्योग ऐसा दूसरा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से राज्य में बेरोजगारी की समस्या का हल और तेजी से आर्थित विकास संभव है। इसलिए हमने उद्योगों की स्थापना हेतु प्रत्येक स्तर पर निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान की है। राज्य का हर युवा उद्यमी बने, सरकार का यह प्रयास है। राज्य में फल सब्जी एवं अनाज का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता हैं, लेकिन इस प्रक्षेत्र में कोई निवेश नहीं आ जा रहा है। इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है।

2-भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला प्रगति मैदान में 14-27 नवम्बर 2017 का आयोजन हुआ है। प्रगति मैदान के बिहार पेविलियन में 18 (अठारह) स्टाॅल लगे हुए है जिसमें आठ स्टाॅल बिहार स्र्टाट-अप का लगा हुआ है तथा आठ स्टाॅल बिहार के हैण्डीक्राफ्ट एवं हैण्डलूम के लगे हुए है।

पेविलियन में सिक्कीग्रास, मूर्तिकला का जीवंत प्रदर्शन (Live Demo) किया जा रहा है। राज्य में हैण्डीक्राफ्ट की बढावा देने हेतु उपेन्द्र महारथी संस्थान इसमें अग्रसर है। नये-नये तकनीक आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम किये जा रहे है। शिल्पियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बुनकरों के उत्थान हेतु N.H.D.C से सूत की आपूर्ति हेतु MOU किया गया है। राज्य के बुनकरों को सीधे सूत की आपूर्ति किये जाने की व्यवस्था की जा रही है।

3-बिहार का कुल जनसंख्या का एक अच्छा खासा हिस्सा युवाओं का है। बिहार में प्रचुर संसाधन है और यहाँ के युवाओं में वह प्रतिभा है, जो किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सके। इसे मद्दे नजर हमने बिहार स्टार्ट-अप नीति, 2017 को मंजूरी दी है।

यह नीति राज्य के समावेशी विकास के लिए अनुकूल स्टार्ट-अप परिस्थिति तैयार करेगी, जिससे युवाओं का सबसे पसंदीदा गंतव्य के रूप में बिहार उभरेगा, जहाँ सभी संभावित क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ढा़ँचे का विकास होगा।
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ऽ इसके लिए बिहार सरकार द्वारा प्रारम्भिक काॅरपस के रूप में पाँच सौ करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है।

ऽ युवा उद्यमियों के प्रारंभिक कार्य-कलाप पर होने वाले व्यय, शोध, कौशल प्रशिक्षण विपणन सहायता के रूप में प्रत्येक स्टार्ट-अप को दस लाख रूपये तक की बीज अनुदान प्रदान की जायेगी।

ऽ स्टार्ट-अप के तहत निरीक्षण हेतु पाँच वर्षों के लिए छुट दी गई है।

ऽ स्टार्ट-अप के लिए राज्य सरकार के औद्योगिक पार्क/एस0एम0ई0 कलस्टर एवं हब में दस प्रतिशत स्थान आवंटित किया जायेगा।

ऽ इस नीति के तहत स्टार्ट-अप को तीन वर्षों के लिए मुफ्त में Space उपलब्ध कराया जायेगा।

ऽ स्टार्ट-अप को राज्य सरकार के विभिन्न अधिनियमों के तहत लाइसेंस/निबंधन की 05 वर्षों की छूट दी जाएगी।

ऽ शैक्षणिक संस्थानों में उद्यमिता मोड्यूल, उद्यमिता सुविधा केन्द्र एवं इनक्युवेशन सेंटर की स्थापना की जायेगी।

ऽ स्टार्ट-अप को इनक्युवेशन सर्पोट प्रदान किया जायेगा जिसके तहत राज्य सरकार द्वारा इनक्युवेटर को निम्न वित्तीय प्रोत्साहन दिये जायेंगे।

ऽ राज्य समर्थित/निबंधित निजी इनक्युवेटर को इनक्युवेशन लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 2 लाख रूपये प्रति इनक्युवेटी की प्रतिपूर्ति की जायेगी। इनक्युवेटर को इनक्युवेटी द्वारा प्राप्त निवेश का 2 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा।

ऽ राज्य समर्थित इनक्युवेटर को इनके इनक्युवेटीज द्वारा प्राप्त किये गये निवेश का 3 प्रतिशत तथा सामाजिक प्रक्षेत्र के स्टार्ट-अप के लिए 5 प्रतिशत अनुदान की प्रतिपूर्ति की जायेगी।

ऽ इनक्युवेटर द्वारा भारत सरकार एवं मल्टीलेटरल डोनर एजेंसिज से प्राप्त फंड के बराबर मैचिंग फंड राज्य सरकार द्वारा दिया जायेगा।

बिहार स्टार्ट-अप नीति, 2017 के तहत देश में पहली बार बिहार में 32 स्टार्ट-अप को बतौर सहायता बीज राशि के रूप में कुल 39.00 लाख रू0 आवंटित किये गये है।

4-राज्य में औद्योगिक निवेश का अधिक सहज बनाने के उदेश्य से बिहार औद्योगिक निेवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2016 दिनांक 06.09.2016 से लागू किया गया है।

निम्न प्रावधान :-

ऽ विकास आयुक्त, बिहार की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद का गठन किया गया है।

ऽ पर्षद के सचिवालय द्वारा काॅन एप्लिकेशन फाॅर्म में आॅनलाईन आवेदन प्राप्त करने तथा आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के अंदर राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद की स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।

ऽ उद्योग स्थापना एवं उत्पादन के लिए सभी प्रकार के क्लियरेंसेस 30 दिन अथवा संबंधित अधिनियम/नियमावली में विहित समय सीमा के अंदर दिये जाने का प्रावधान है।

ऽ यदि समय सीमा के अंदर संबंधित विभाग द्वारा क्लियरेंस नहीं दिया जाता है तो डिम्ड क्लियरेंस का प्रावधान है।

ऽ समय सीमा के अंतर्गत क्लियरेंस नहीं होने की स्थिति में संबंधित लोक प्राधिकार पर दंड का भी प्रावधान रखा गया है।

इसके तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद द्वारा कुल 539 प्रस्तावों को Stage-1 क्लियरेंस दिया जा चुका है जिसमें कुल निवेश 954.78 करोड़ रूपये का है। 55 प्रस्तावों पर वित्तीय प्रोत्साहन क्लियरेंस पर सहमति दी जा चुकी है।

5-मैं दुहराना चाहूँगा कि बिहार में औद्योगिक निवेश हेतु अनुकूल वातावरण बना है। आधारभूत संरचना जैसे सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सभी आवश्यक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। हमने कानून का राज स्थापित किया है। उद्यमियों में सुरक्षा की भावना पैदा की है।

अतः मैं बिहार के औद्योगिक विकास में सहभागी बनने के लिए आप सबको कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, चर्म उद्योग, स्वास्थ्य, गैर परम्परागत ऊर्जा, प्लास्टिक एवं रबर उद्योग, तकनीकी शिक्षा एवं सूचना प्रावेधिकी उद्योग इत्यादि के प्रक्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता हूँ। बिहार एक बड़ा बाजार है तथा मानव शक्ति से भरपूर है। बिहार को औद्योगिक शीर्ष पर पहुँचाने का इससे बढ़ियाँ अवसर हमारे पास दूसरा नहीं हो सकता है।

इसी प्रयास में भारत सरकार एवं बिहार सरकार के सूचना प्रावैधिकी विभाग द्वारा संयुक्त प्रयास से आई0टी0 सेक्टर में निवेशकों को आकर्षित करने हेतु एक इन्वेस्टर काॅन्क्लेव का आयोजन किया गया है जिससे आई0टी0 सेक्टर की मल्टी नेशनल कंपनियों को अपना उद्यम स्थापित करने हेतु आमंत्रित किया जा सके।

पुनः आप सबों का सहयोग राज्य को इसी तरह मिलता रहे-इन्हीं शुभ कामनाओं के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूँ।

बिहार सूचना केन्द्र, नई दिल्ली
(सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, बिहार सरकार)